दहेज हत्या में पति और सास को 10-10 साल की सजा
- सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
मैनपुरी। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता की जलाकर हत्या करने के मामले में एफटीसी जज शक्ति सिंह ने पति और सास को दोषी पाकर दस-दस साल की सजा सुनाई है। दोनों को सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी देना पड़ेगा।
जिला फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज के सराय शेख निवासी लवली की शादी जून 2015 में यूनुस निवासी दिहुली थाना बरनाहल के साथ हुई थी। शादी के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर ससुरालीजनों ने विवाहिता का उत्पीड़न शुरू कर दिया। आरोप है मांग पूरी नहीं होने पर ससुराल के लोगों ने उसको जला दिया। 28 जनवरी 2016 को उपचार के दौरान लवली की मौत हो गई। उसके भाई फिरोज अली ने पति यूनुस, ससुर निजाम, सास हसीना बेगम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी जज शक्ति सिंह की कोर्ट में हुई।
वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाही के आधार पर सास और पति को दहेज हत्या का दोषी पाया गया। अभियोजन की पैरवी एडीजीसी अनूप यादव, मुकुल रायजादा ने की। एफटीसी जज ने सास और पति को 10-10 साल की सजा सुनाई है। दोषी पाए गए पति और सास पर सात सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मृत्यु पूर्व बयान से हुई सजा
उपचार के दौरान लवली के मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज किए। उसने बयानों में पति और सास पर दहेज की खातिर जलाने का आरोप लगाया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु पूर्व बयानों के आधार पर सास और पति को सजा सुनाई गई। ससुर निजाम के खिलाफ गवाही नहीं होने पर उसको दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।
जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
दहेज हत्या के मामले में जेल जाने केे बाद पति यूनुस और सास हसीना बेगम की किसी भी अदालत से जमानत मंजूर नहीं हुई। उनको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शनिवार को निर्णय सुनने के लिए उनको जेल से अदालत लाया गया। सजा सुनाए जाने के बाद उनको हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।