पांच साल बाद जेल से रिहा होने के बाद बच्चों के साथ दंपती
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आगरा जनपद के बाह के जरार निवासी नरेंद्र और नजमा को पांच साल बाद बेटा अजीत और बेटी अंजू मिल गए। वह दोनों को कानपुर के आश्रय गृह से शुक्रवार को आगरा ले आए। बच्चों के लिए दोनों जेल से रिहाई के बाद से ही इधर-उधर भटक रहे थे। अब उनको बच्चों की परवरिश की चिंता सता रही है।
बाह के जरार निवासी योगेंद्र सिंह के छह वर्षीय बेटे रंजीत की एक सितंबर 2015 को हत्या कर दी गई थी। इस आरोप में पुलिस ने नरेंद्र और उसकी पत्नी नजमा को जेल भेजा था। वह पांच साल से जेल में थे। उनके बच्चे तीन साल की बेटी अंजू और आठ साल का बेटा अजीत दादा-दादी के पास रह रहे थे। अक्तूबर 2019 में दादा-दादी ने बच्चों के पालन पोषण में असमर्थता जताते हुए दोनों को पुलिस की मदद से आश्रय गृह भिजवा दिया था। अंजू को राजकीय बाल गृह बालिका, कानपुर भेजा था, जबकि अजीत को फिरोजाबाद के राजकीय बाल गृह भेजा गया था। बाद में अजीत को भी कानपुर के आश्रय गृह भेजा गया।
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कोर्ट ने 19 जनवरी को नजमा और नरेंद्र को दोष मुक्त करते हुए रिहा किया था। इसके बाद से दोनों बच्चों के लिए भटक रहे थे। उन्हें पता चला कि बच्चे आश्रय गृह में हैं। इस पर बाल कल्याण समिति के आदेश पर गुरुवार को दोनों ने बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। शुक्रवार को दोनों को आगरा ले आए। बच्चों के मिलने से माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।