डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्नीचर खरीद में घोटाले के आरोप लगे हैं। ये मामला भी प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल का है। इसमें बेड, अलमारी, मेज की कीमत से तीन से चार गुना अधिक के बिल लगाने की शिकायत कुलपति से की है। इनके बिल भुगतान के लिए आने पर खुलासा हुआ।
कर्मचारी संघ के महामंत्री डॉ. टाइटलर ने कहा कि प्रभारी कुलपति रहे प्रो. पाठक भले ही अभी विश्वविद्यालय में तैनात नहीं हैं, लेकिन उनके फर्जीवाड़े और घोटालों को पाकसाफ करने के लिए यहां साजिश रची जा रही है। इन फर्नीचर के बिल को भी गुपचुप तरीके से पास कराने की तैयारी थी। जानकारी होने पर इसका विरोध किया और बिल पास नहीं होने दिए हैं।
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी का कहना है कि प्रो. पाठक के कार्यकाल में हुए फर्जीवाड़े और घोटालों की एसटीएफ की जांच को प्रभावित करने के लिए रिकार्ड और दस्तावेजों में छेड़छाड़ हो रही है। उनके निर्णयों को सही साबित करने के लिए तारीख और हस्ताक्षर में भी छेड़छाड़ की है। बीते परीक्षा समिति की बैठक में भी सदस्यों ने बीएचएमएस पुर्न मूल्यांकन में तारीख से छेड़छाड़ पकड़ी थी। यहां तक कि एसटीएफ भी कुलपति को पत्र भेजकर इसकी शिकायत कर चुकी है।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि शिकायत पर जांच शुरू की है। इनकी खरीद के लिए पूर्व के कुलपति ने वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी ली थी। तीन कंपनियों से फर्नीचर खरीदे हैं। इसमें 18 फीसदी जीएसटी भी है। पूर्व में खरीदे गए फर्नीचर की कीमत से मिलान कर रहे हैं।
कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि बेड, अलमारी और मेज की खरीद के बिल अभी भुगतान के लिए नहीं आए हैं। इनकी कीमत में क्या अंतर है, भुगतान के लिए आने पर ही पता चलेगा। इनकी कीमत में अंतर की शिकायत की जानकारी मिली है। इसे कुलपति के संज्ञान में भी लाए हैं।