20 प्रतिशत की मौत गंभीर निमोनिया होने के कारण हुई। सात फीसदी मरीजों में टीबी, किडनी, लिवर, हृदय संबंधी बीमारी मिली। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज में पांच विभागों के चिकित्सकों की टीम भी बनाई गई थी।
कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि मधुमेह-उच्च रक्तचाप के मरीजों में संक्रमण से हालत लगातार बिगड़ने से मरीजों की मौत हुई। मरने वालों में 45 से 65 साल की आयु के मरीज सबसे ज्यादा थे।
शुगर स्तर को नियंत्रित रखें मरीज : डॉ. प्रभात अग्रवाल
एसएन कॉलेज के फिजीशियन डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि मधुमेह मरीज घबराएं नहीं, बस शुगर स्तर को नियंत्रित करें। दवाएं नहीं खा रहे हैं तो डॉक्टर के परामर्श पर इनको शुरू करें। ब्लडप्रेशर को भी नियंत्रित करें। बीपी और शुगर की जांच कराते रहें।
मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज नियमित योग कर सकते हैं। साइकिल चलाएं या फिर तेज गति से 30 से 40 मिनट तक रोज टहलें। ऐसा करने से वजन नहीं बढ़ेगा और फिट रहेंगे। खाने-पीने में दाल, चपाती, सलाद का भरपूर प्रयोग करें।
संक्रमण से होने वाली मौत में सबसे ज्यादा 45 से 65 साल की उम्र के मरीज थे। इनकी संख्या 50 प्रतिशत थी। इसमें पुरुषों की संख्या अधिक थी। 65 से अधिक उम्र के मरीज 20 प्रतिशत और 45 साल से कम आयु के 30 प्रतिशत मरीज थे। सभी मृतक आईसीयू में वेंटिलेटर पर थे इनको ऑक्सीजन भी दी गई।