आगरा के शाहगंज के भोगीपुरा क्षेत्र में स्थित एक बस्ती में लोग पढ़े-लिखे भले ज्यादा नहीं हैं, लेकिन मौके की नजाकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसलिए तो अपनी बस्ती के बाहर बड़ा कपड़ा लगाकर बाहरी लोगों का प्रवेश बंद कर दिया है। इस बस्ती में ज्यादातर मजदूर लोग रहते हैं।
ये उदाहरण उनके लिए है जो लॉकडाउन में अब भी गंभीर माहौल को हल्के में ले रहे हैं। बेवजह इधर-उधर जाकर खुद और दूसरों की जान खतरे में डाल रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से ही बस्ती के लोगों ने आपस में तय कर बाहरी लोगों का प्रवेश बंद कर दिया।
इस बस्ती में 70 से ज्यादा घर हैं। अधिकतर जूता कारीगर हैं। इस समय काम ठप पड़ा हुआ है। इसके बावजूद जागरूकता में कमी नहीं है। रोजाना घर ही नहीं बस्ती की भी सफाई होती है। बच्चे से लेकर बड़े तक मास्क पहनते हैं। जरूरत पड़ने पर घर से एक व्यक्ति सामान लेने जाता है।
बस्ती की रोजाना की जा रही साफ-सफाई
- हमनें लॉकडाउन के बाद से ही बस्ती के बाहर कपड़ा लगाकर प्रवेश बंद कर दिया है। - सतीश
- घर और बस्ती की रोजाना साफ सफाई की जा रही है। जिससे बीमारी नहीं पनपे। - राकेश
- एहतियात बरतते हुए स्थानीय लोग मास्क का प्रयोग करते हैं। - रामस्वरूप
कोरोना वायरस से बचाव के लिए सजगता
सिकंदरा क्षेत्र में गैलाना रोड स्थित चंद्रा नगर कॉलोनी के लोगों ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए सजगता दिखाई है। उन्होंने कॉलोनी के बाहर बैरियर लगाकर उस पर बाहरी लोगों के प्रवेश निषेध का टैग लगा दिया है।
आगरा में अब तक 48 मामले
बता दें कि आगरा में अब तक कोरोना वायरस के 48 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 31 जमाती हैं, जो दिल्ली से लौटे थे। ये लोग मंटोला और काजीपाड़ा में रुके थे। इसके कारण यहां की छह बस्तियों को प्रशासन के निर्देश पर पुलिस ने सील कर दिया है।
इनके द्वार पर बैरियर लगा दिए गए हैं। माइक से चेतावनी दी गई है कि यदि कोई घर से बाहर निकला तो कार्रवाई की जाएगी। ये सभी बस्तियां उन मस्जिदों के आसपास की हैं जहां ठहरे जमाती कोरोना संक्रमित मिले हैं। इन बस्तियों में पुलिस का दिन-रात का पहरा भी लगा दिया गया है।