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रियल एस्टेट: आगरा में नहीं लौटे 25 हजार मजदूर, 1200 करोड़ की 25 परियोजनाएं ठप पड़ीं

Sat, 25 Jul 2020 05:27 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • लॉकडाउन खुलने के बाद भी हालात जस की तस
  • बिल्डरों के सामने किस्तें चुकाने का संकट
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लॉकडाउन खुलने के बाद भी रियल एस्टेट सेक्टर में हालात जस के तस हैं। आगरा जिले में कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है। जिले में करीब 25 बड़े प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। मुख्य समस्या श्रमिकों की है। लॉकडाउन के बाद करीब 25 हजार श्रमिक काम पर नहीं लौटे हैं। 

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ऐसे में औसतन 1200 करोड़ रुपये की परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। इसके अलावा बाजार में नकदी की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है। बिल्डरों का कहना है कि समस्याएं कई हैं, बैंक ऋण देने में आनाकानी कर रहे हैं। खरीदार सामने नहीं आ रहे। हालात ये हैं कि पुराने ऋण की किस्तें चुकाने में भी दिक्कत हो रही है।
 

इन पर काम रुका
- जी प्लस-2 
- मल्टीस्टोरी
- टाउनशिप विला
- प्लॉट डेवलपमेंट
- व्यावसायिक भवन

यह भी संकट
बाजार में नकद तरलता की कमी है
कीमतें गिरने के इंतजार में खरीदार
लागत से कम मूल्यों पर कर रहे बिक्री

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श्रमिक लौटें तो काम चले
क्रेडाई के पूर्व अध्यक्ष उमेश शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जा चुके करीब 25 हजार श्रमिक लौटे नहीं हैं। ऐसे में औसतन 1200 करोड़ रुपये की 25 परियोजनाएं ठप पड़ी हुई हैं।  श्रमिक लौटें तो काम चले।

बाजार में नकदी की कमी
रेडिको के सचिव दीपेंद्र शंकर अग्रवाल ने कहा कि बाजार में नकदी का काफी अभाव है। इसके लिए कई बिल्डर लागत से कम मूल्यों पर भी बिक्री कर रहे हैं। दूसरी तरफ खरीदार अभी और कीमत गिरने के इंतजार में है। 

सबसे बुरे दौर में कारोबार 
बिल्डर निखिल अग्रवाल ने बताया कि इस समय रियल एस्टेट सेक्टर सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। निवेशक तो दूर की बात खरीदार भी नदारद हैं। बैंक ऋण तक देने में आनाकानी कर रहे हैं। 

लागत निकालने पर जोर
बिल्डर किशोर गुप्ता ने कहा कि इस समय बिल्डरों का अपनी लागत निकालने पर जोर बना हुआ है। जिससे ब्याज के मीटर पर लगाम लग सके। कारोबार की हालात काफी खराब है। 
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