फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एसएनः कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की गाइड लाइन बदली, अब ऑक्सीजन की जरूरत होते ही लगेगा रेमडेसिविर इंजेक्शन

Tue, 22 Sep 2020 09:35 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज की गाइड लाइन बदली, 100 मरीजों पर ट्रायल में 95 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर की नहीं पड़ी जरूरत,
आईसीएमआर को भी भेजी जानकारी, अभी तक वेंटिलेटर पर जाने के बाद ही दिया जाता था इंजेक्शन
विज्ञापन
रेमडेसिविर दवा - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संक्रमित मरीजों की जान बचाने और वेंटिलेटर पर जाने से बचाने के लिए अब मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होते ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाएगा। एसएन मेडिकल कॉलेज में 100 मरीजों के ट्रायल के बाद बेहतर परिणाम सामने आने के बाद इलाज की गाइड लाइन बदल दी है। अभी तक वेंटिलेटर पर पहुंचने के बाद ही मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा रहा था।
विज्ञापन


इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निर्देशन में एसएन में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 100 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होने पर ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया गया। चिकित्सकों की स्टडी में पाया इनमें से पांच फीसदी ही मरीजों वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी और बाकी के 95 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन और इंजेक्शन से सुधार हुआ।

ये भी पढ़ें- ब्रज में बने फिल्म सिटीः ताजमहल से लेकर यमुना घाटों तक शूटिंग की शानदार लोकेशन 
विज्ञापन


बेहतर परिणाम होने पर इसकी रिपोर्ट आईसीएमआर को भी भेजी गई। इससे पहले वेंटिलेटर पर पहुंचने पर ही मरीजों को इंजेक्शन दिया जाता था, जिससे मरीज की जान बचाना मुश्किल होता था।
विज्ञापन

आईसीयू प्रभारी डॉ. राजीव पुरी ने बताया कि मरीजों में गंभीर और अति गंभीर श्रेणी के दो वर्ग बनाए गए हैं। इसमें सांस की गति एक मिनट में 24 से अधिक बार होने लगे और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 94 प्रतिशत से कम होने पर गंभीर की श्रेणी और सांस लेने की गति एक मिनट में 30 से अधिक बार हो और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 90 प्रतिशत से कम होने वाले मरीजों को अति गंभीर मरीजों की श्रेणी में रखकर इलाज किया जाता है।


सामान्य तौर पर स्वस्थ लोग एक मिनट में 16 से 20 बार सांस लेते हैं और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 94 प्रतिशत से अधिक होती है। रेमडेसिविर इंजेक्शन पहले देने से मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और पांच प्रतिशत को ही आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ी। 

मरीजों की मौत दर भी कम होने लगी
अब मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ते ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जा रहा है। इससे हालत में सुधार तेजी से होने के साथ मरीजों की मौत दर भी कम होने लगी है। शुरूआती दौर में एक ही कंपनी इस इंजेक्शन को बना रही थी, अब चार-पांच बना रही हैं। इनका मिलना भी सुगम हुआ है, इंजेक्शन का अतिरिक्त स्टॉक भी किया है। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य  एसएन कॉलेज 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें