संक्रमित मरीजों की जान बचाने और वेंटिलेटर पर जाने से बचाने के लिए अब मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होते ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाएगा। एसएन मेडिकल कॉलेज में 100 मरीजों के ट्रायल के बाद बेहतर परिणाम सामने आने के बाद इलाज की गाइड लाइन बदल दी है। अभी तक वेंटिलेटर पर पहुंचने के बाद ही मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा रहा था।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निर्देशन में एसएन में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 100 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होने पर ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया गया। चिकित्सकों की स्टडी में पाया इनमें से पांच फीसदी ही मरीजों वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी और बाकी के 95 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन और इंजेक्शन से सुधार हुआ।
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बेहतर परिणाम होने पर इसकी रिपोर्ट आईसीएमआर को भी भेजी गई। इससे पहले वेंटिलेटर पर पहुंचने पर ही मरीजों को इंजेक्शन दिया जाता था, जिससे मरीज की जान बचाना मुश्किल होता था।