मार्च से सितंबर तक 5703 संक्रमित मिले हैं। इनमें से 4,766 ठीक हुए हैं। 126 की मौत हुई है। 1,87,376 लोगों की जांच की गई है।
इनमें से 3.04 फीसदी संक्रमित मिले हैं। संक्रमितों में से 2.21 प्रतिशत की जान गई है जबकि 83.57 फीसदी ठीक हुए हैं। सितंबर में ही
पहली बार हुआ जब एक ही दिन में 140 से ज्यादा नए मरीज मिले।
ताजनगरी में सितंबर में 2,733 लोग संक्रमित हुए जबकि 2332 ने वायरस को मात दी। संक्रमण की रफ्तार इसी महीने सबसे तेज रही। नौबत यहां तक आई कि एसएन मेडिकल कॉलेज में आईसीयू फुल हो गया। मार्च में शुरू हुए संक्रमण से अब तक यह पहला मौका था जब ऑक्सीजन की भारी किल्लत सामने आई। हालांकि इसी महीने सबसे ज्यादा लोग ठीक हुए। संक्रमितों की मृत्यु का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा।
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मार्च से सितंबर तक 5703 संक्रमित मिले हैं। इनमें से 4,766 ठीक हुए हैं। 126 की मौत हुई है। 1,87,376 लोगों की जांच की गई है। इनमें से 3.04 फीसदी संक्रमित मिले हैं। संक्रमितों में से 2.21 प्रतिशत की जान गई है जबकि 83.57 फीसदी ठीक हुए हैं। सितंबर में ही पहली बार हुआ जब एक ही दिन में 140 से ज्यादा नए मरीज मिले।
15 से 20 सितंबर तक तो हाल यह रहा कि संक्रमित मिलने का रोज नया रिकार्ड बनता और अगले दिन टूट जाता। डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, साथ ही ठीक होने की दर बेहतर हुई है।
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रास आ रहा होम आइसोलेशन, आधे से ज्यादा मरीज घर पर करा रहे इलाज
मामूली खांसी-बुखार और बिना लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन रास आ रहा है। रोजाना 50 से 60 मरीज घर पर रहकर ही इलाज करा रहे हैं। नियंत्रण कक्ष से चिकित्सक इनकी सेहत की जानकारी भी कर रहे हैं।
संक्रमित मरीज मिलने पर सर्विलांस टीम घर पहुंचकर मरीज की स्क्रीनिंग कर बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में खराश, अन्य कोई बीमारी के बारे में जानकारी करती है। मरीजों में लक्षण नहीं होने या मामूली दिक्कत पर होम आइसोलेशन की संस्तुति करते हैं।
इससे पहले मरीज को तापमान, रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा जांचने के बारे में बताने के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। मरीज का विवरण, फोन नंबर कंट्रोल रूम में अपडेट कर रोजाना सेहत के बारे में पूछा जाता है। किसी परेशानी होने पर कंट्रोल रूम को जानकारी दे सकते हैं। अभी होम आइसोलेशन में 684 मरीज हैं।
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि स्क्रीनिंग में सांस लेने में परेशानी, हृदय, किडनी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारी मिलने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, बाकी बिना लक्षण वाले मरीज होम आइसोलेशन में रहते हैं। इनकी रोजाना सेहत की अपडेट भी ली जाती है।
केस एक- यमुनापार के 48 साल के प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, संक्रमित होने पर वह होम आइसोलेशन में हैं, परिजन भी क्वारंटीन हैं। उन्होंने बताया कि फोन पर सेहत की जानकारी लेते हैं, एक बार दिक्कत हुई तो फोन पर बताया, दवा बताई, उससे आराम मिला।
केस दो- दयालबाग में 28 साल की युवती संक्रमित होने पर होम आइसोलेशन में हैं। रोजाना थर्मामीटर और पल्स ऑक्सीमेट्री से रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा मापने और दवाएं लेती हैं। कंट्रोल रूम से फोन पर हालचाल लिया जाता है। परिजन भी ख्याल रखते हैं।