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राहत के बीच लॉकडाउन के उद्देश्य की उड़ी धज्जियां

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कासगंज के बस स्टैंड पर बस मिलने के बाद उसमें सवार हुए यात्री। - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को थामने के लिए देश भर में लॉकडाउन किया गया, लेकिन लोगों की पीड़ा के दृष्टिगत चलाई गई बसों में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ रही है। आशंका इस बात की भी गहरा गई है कि लोगों को राहत देने के लिए शुरू की गई बस सेवा कहीं उनके लिए ही मुसीबत न बन जाए। क्योंकि बसों से लेकर सड़कों तक कहीं भी सामाजिक दूरी का अनुपालन यात्री नहीं कर पा रहें। बसस्टैंड पर न तो सैनिटाइजर की व्यवस्था है और न ही हाथ धोने की।
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कासगंज बस स्टैंड से करीब 65 से अधिक रोडवेज बसें अन्य जनपदों के लिए व 12 से अधिक प्राइवेट बसें लोकल रूट पर लगाई गई हैं। जिससे जनपद की सीमा पर छोड़ने वाली बसों के यात्रियों को प्राइवेट वाहन की मदद से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। बसों के अंदर की तस्वीरें चिंताजनक हैं। परिचालक की सीट से लेकर बस के अंदर तक यात्रियों की भीड़ किसी त्योहार पर लौटने वाली भीड़ से ज्यादा है। यह यात्री नोएडा, हरियाणा, हिसार, फरीदाबाद, दिल्ली, जयपुर आदि क्षेत्रों से लौटें हैं और यह जनपद की सीमाओं के नजदीक जनपदों में जाने वाले यात्री हैं। कासगंज तक अन्य बसों की सहायता से पहुंचे यात्रियों को कासगंज से रोडवेज व प्राइवेट बसों की सहायता से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है।
प्राइवेट वाहनों में सबसे अधिक खराब स्थिति
रोडवेज की अपेक्षा लोकल रूट पर चल रही मेटाडोर, प्राइवेट बस की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। 25 से 30 सीटर बसों में 50 से 75 यात्री तक सफर कर रहे हैं। वहीं मेटाडोर में भी सैकड़ों की संख्या में यात्री झुंड बनाकर सफर कर रहे हैं।
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यात्रियों का नापा जा रहा तापमान
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूर थोड़ी सजगता बसस्टैंड पर देखने को मिली। यहां विभाग की ओर से लगाए गए कैंप में मरीजों का तापमान देखा जा रहा है। जिन मरीजों का तापमान ठीक है, उनको मार्क कर बसों में रवाना किया जा रहा है। कैंप पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी शारिख ने बताया कि रविवार दोपहर 2 बजे तक 175 मरीजों का तापमान चेक किया गया। दोपहर तक कहीं भी चिंताजनक स्थिति नहीं मिली।
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