मथुरा में वृंदावन के केशवधाम में एक सितंबर से तीन सितंबर तक होने जा रही आरएसएस की समन्वय बैठक में सरकार और संगठन के बीच तालमेल का फार्मूला तैयार किया जाएगा। यह फार्मूला सभी भाजपा शासित राज्यों में लागू होगा। संघ को लगातार सूचनाएं मिल रही हैं कि कई जगह सरकार और संगठन के लिए खींचतान शुरू हो गई है।
दरअसल ऐसा समझा जा रहा है कि भाजपा शासित कई राज्यों में संगठन और सरकार के रिश्तों में कड़वाहट घुलने लगी है। संगठन के लोग जिन्होंने चुनाव के वक्त महीनों तक अपना घर नहीं देखा वह खुद को उपेक्षित मानकर खामोश होकर बैठ गए हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में ही ऐसे 1200 पदाधिकारियों को अलग अलग सीटों पर माहौल बनाने के लिए लगाया गया था।
इन सभी का जुड़ाव संघ और संघ से जुड़े संगठनों से था। कई और दूसरे ऐसे ही दूसरे उदाहरण भी संघ तक पहुंचे हैं, लिहाजा अब सरकार और संगठन के बीच तालमेल का मजबूत फार्मूला तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
2019 चुनाव से पहले ये जरूरी
केशवधाम परिसर में बैठक की तैयारियां
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ऐसे में वृंदावन में एक से सितंबर से तीन सितंबर तक होने वाली आरएसएस की समन्वय समिति की बैठक में इस पर भी विचार किया जाएगा। संघ का मानना है कि 2019 के चुनाव को फतह करने के लिए कार्यकर्ताओं में जोश होना जरूरी है। बूथ तक के कार्यकर्ता को लगना चाहिए कि प्रदेश में उनकी सरकार है, आने वाले चुनावों में फिर संगठन के इन्हीं पदाधिकारियों को लगाया जाना है। उधर, आरएसएस की इस समन्वय समिति की बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल करीब 200 पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। पदाधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। केशवधाम में बैठक को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
विद्या भारती के स्कूलों की भी होगी समीक्षा
विद्या भारती द्वारा संचालित किए जाने वाले स्कूलों की भी समीक्षा होगी। माना जा रहा है कि विद्या भारती भाजपा शासित राज्यों में इन स्कूलों की संख्या बढ़ाना चाहती है लेकिन जमीन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। लिहाजा इस मुद्दे को भी यहां रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश में ही मौजूदा समय में विद्या भारती के एक हजार से ज्यादा स्कूल चल रहे हैं जबकि 78 नए स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही है।