गले में झूलते मेडल, हाथों में प्रमाण पत्र और चेहरे पर खुशी। कार्यक्रम अध्यक्ष राज्यपाल बतौर कुलाधिपति राम नाईक के हाथों मेडल और प्रमाण पत्र पाकर मेधावियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विश्वविद्यालय के 81वें दीक्षांत समारोह में तीन डीलिट, 410 पीएचडी, 137 एमफिल के मेधावी सम्मानित हुए,107 को मेडल दिए गए। सर्वाधिक 13 मेडल एसएन मेडिकल कालेज की छात्रा चारू यादव के नाम रहे। चार मेडल के साथ सेंट जोंस कालेज के आकाश का दूसरा स्थान रहा।
सुबह 11:30 बजे राज्यपाल की अनुमति मिलते ही समारोह शुरू हुआ। कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पढ़ी। आगामी साल का कलेंडर घोषित करने और कालेजों की लॉगइन आईडी तैयार करने की बात कही। कुलसचिव के निर्देश पर संकाय अध्यक्षों ने अपने विभाग के पीएचडी और एमफिल के मेधावियों की घोषणा की। कुलाधिपति ने सभी को डिग्री प्रदान करने की अनुमति दी। मंच पर बुलाकर मेडल पहनाए गए।
राज्यपाल ने छात्रों को सत्य, धर्म का पालन करने के साथ परिजन और बड़ों का सम्मान करने की दीक्षा दी। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद(नैक) के निदेशक प्रो. डीपी सिंह ने मेधावियों को बधाई दी। संचालन प्रो. सुगम आनंद ने किया।
कौशल और दक्षता का विकास करने वाली हो शिक्षा : प्रो. डीपी सिंह
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के निदेशक प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि वर्तमान में कौशल और दक्षता का विकास करने वाली शिक्षा हो। हाथों में रोजगार और 21वीं सदियों की चुनौतियां से निपटा जा सके। साथ ही उन्होंने मेधावियों को कर्तव्य का भी भान कराया। कहा, उच्च शिक्षा पाकर इंजीनियर, डाक्टर, अधिवक्ता, वैज्ञानिक बनना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। इनके साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का कार्य सिर्फ डिग्रियां प्रदान करना भर नहीं है। छात्र सच्चे और जिम्मेदार नागरिक बनें, यह जिम्मा भी संस्थानों का उठाना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी से जिंदगी आरामदाय हो गई हो, औसत आयु और आय भी बढ़ी है, लेकिन मानसिक बीमारियों की वजह भी यही हैं। उन्होंने छात्राें को विनम्र, विवेक और संस्कारवान बनने की नसीहत दी।