प्रबंध एवं सेवा समिति ने मंदिर में वार्षिक मेले के आयोजन से पूर्व सोमवार को प्रेसवार्ता का आयोजन किया था। इसमें मंदिर के महंत वीरेंद्र आनंद ब्रह्मचारी को नहीं बुलाया गया। महंत ने समिति के अध्यक्ष चौधरी दरब सिंह के समक्ष विरोध जताया। इस पर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी।
वह मीडिया के सामने ही एक-दूसरे पर मंदिर के चढ़ावे को हड़पने जैसे गंभीर आरोप लगाने लगे। मामला बढ़ता देख महंत के फोन पर पुलिस आ गई। मगर, पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी। इस वादविवाद के बीच प्रेसवार्ता भी हुई। महंत ने मंच पर ही मीडिया के सवालों के जवाब दिए।
मंदिर महंत वीरेंद्र आनंद ब्रह्मचारी ने बताया कि सन 1998 से मंदिर की सेवा कर रहा हूं। मंदिर के सभी विवाद और निर्माण आदि कार्यों को देखता हूं। ऐसे में मंदिर के दानपात्र में जो भी चढ़ावा आता है, वो चौधरी दरब सिंह ले जाते हैं। यहां तक कि मंदिर के जीर्णोद्धार में स्टील की ग्रिल निकली थी, उसे भी उन्होंने अपने घर पर लगा लिया।
प्रबंध एवं सेवा समिति के अध्यक्ष चौधरी दरब सिंह ने बताया कि समिति वर्ष 2000 से मंदिर से जुड़े कार्यों को देखती आ रही है। महंत को समिति ने मंदिर की सेवा के लिए रखा था, लेकिन महंत मंदिर का स्वामित्व चाहते है। चामुंडा मां पर जो चढ़ावा आता है वो स्वयं रखते है, जो नियम विरुद्ध है। मंदिर के दूसरे महंत सुरेंद्र गिरी ने बताया कि कई सालों से मंदिर में सेवा कर रहा हूं, लेकिन महंत मुझे एक पैसा नहीं देते हैं। मंदिर में भक्तों की ओर से जो चढ़ावा आता है, उसे पूरा स्वयं रखते है।