आगरा में जिन अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया गया, उनका निरीक्षण करने के लिए जब एडीए सचिव पहुंचीं, तो दृश्य देख हैरान रह गईं। यहां पर फिर से निर्माण होता मिला।
ऐसे ध्वस्तीकरण के क्या मायने, जहां ध्वस्त हो चुकी कॉलोनियों में अवैध निर्माण हो रहा हो। जिम्मेदार क्षेत्रीय सुपरवाइजर व अभियंताओं की जवाबदेही तक तय न हो। बृहस्पतिवार को सत्यापन करने पहुंचीं एडीए सचिव को यह नजारा दिखा। वह मंडलायुक्त के निर्देश पर वहां गई थीं। ध्वस्त हो चुकी अवैध कॉलोनियों में धड़ल्ले से निर्माण हो रहा था।
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शहर में अवैध कॉलोनियों की बाढ़ आ गई है। ध्वस्तीकरण के आंकड़ों में भी झोल है। एडीए की ही एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 साल में 600 से अधिक अवैध कॉलोनियां ध्वस्त की गईं। जबकि दूसरी रिपोर्ट 175 कॉलोनियां ध्वस्त दर्शाती हैं। यह दोनों ही रिपोर्ट मंडलायुक्त के सामने रखी गईं। उनकी नजर भी चूक गई। बार-बार शिकायतें मिलने पर मंडलायुक्त व एडीए अध्यक्ष रितु माहेश्वरी ने ध्वस्त कॉलोनियों का सत्यापन के निर्देश उपाध्यक्ष को दिए थे।
बृहस्पतिवार को सचिव श्रद्धा शांडिल्यायन ताजगंज वार्ड, हिगोट खेड़िया पहुंची। जहां पूर्व में 15 हजार वर्ग गज में विकसित अवैध कॉलोनी गोल्डन हाइट को ध्वस्त किया गया था। मान सिंह, हुकुम सिंह की खसरा संख्या 446 में ध्वस्त हो चुकी इस कॉलोनी में सचिव को दोबारा अवैध निर्माण होता मिला। सचिव के निर्देश पर फिर उसे बुलडोजर से ढहा दिया गया है। लोगों का आरोप है कि एडीए के सुपरवाइजर व अभियंताओं से साठगांठ हैं।