आगरा के आईजी-डीआईजी के बंगले की जमीन पर भूमाफिया की लंबे समय से नजर है। पांच साल पहले भी इसी भूमि के दो इकरारनामे हुए थे। पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है।
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नाई की मंडी के केस में आरोपी इकबाल खां, इरशाद खां, फिरोज खां, दिलशाद खां, फैसल खां ने यह इकरारनामे किए थे। इसके बाद तीसरा इकरारनामा इन्हीं लोगों ने सौरभ अग्रवाल और शाहिद रजा के नाम किया। मई 2025 में इसी मामले में अदालत के आदेश पर दो एफआईआर दर्ज हुईं, जिनकी विवेचना ही चल रही है।
प्रतीक्षा एन्क्लेव निवासी राकेश कुमार ने दो केस दर्ज कराए थे। आरोपियों ने 17 मार्च 2020 को दो इकरारनामे किए। इनमें एक 2,074 वर्ग मीटर जमीन तथा दूसरा 3,687 वर्ग मीटर जमीन का था। दोनों की एवज में पांच लाख नकद व आठ लाख के चेक दिए गए थे।
इकरारनामे में राकेश कुमार के दोस्त राकेश शर्मा भी शामिल थे। 16 मई 2024 को राकेश शर्मा का देहांत हो गया। इसके बाद राकेश कुमार ने आरोपियों से इकरारनामे में बदलाव करने को कहा तो वह तैयार नहीं हुए। इसी बीच उन्होंने सौरभ बंसल से सौदा कर दिया। इसके बाद ही राकेश ने केस दर्ज कराए।
तहसील में सक्रिय माफिया से गठजोड़
आरोपियों ने सदर तहसील में सक्रिय गिरोह से तार जुड़े थे। यही कारण है कि मार्च 2024 में इकबाल खां, इरशाद खां, फिरोज खां, दिलशाद खां, फैसल खां ने तहसील में नामांतरण कराया था। जो निरस्त हो चुका है, जबकि नाई की मंडी थाने में दर्ज दो केसों में वर्ष 2020 में जमीन के इकरारनामा कराने का आरोप है।
इससे साफ है कि नामांतरण से पहले ही आरोपियों ने दो इकरारनामे कर दिए थे। उन्हें पूरा भरोसा होगा कि नामांतरण तो वह करवा ही लेंगे। दूसरी ओर, नाई की मंडी के धोखाधड़ी के केस में फंसने के बाद कारोबारी सौैरभ बंसल ने खुद को बचाने के लिए रकाबगंज थाने में अपनी फर्म बिग डैडी के साझीदारों पर ही केस दर्ज करा दिया, ताकि खुद को बचा सके। केस में उसने कपिल अग्रवाल, सनी जैन और प्रशांत जैन को आरोपी बनाया। प्रशांत जैन इकरारनामे में गवाह बना था। पुलिस की जांच में सनी जैन का आपराधिक इतिहास मिला है। वह वर्तमान में जेल में है। वह बर्तन वाले कारोबारी का करीबी है।