योगी सरकार ने आगरा के मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखने का आदेश दिया है। आगरा के लोगों ने इस पर खुशी जताई है। वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे भाजपा का नया शिगूफा बताया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर करने की जो घोषणा की, उसका सांसद, मंत्री, विधायकों के साथ आम लोगों ने भी स्वागत किया है। उनका कहना है कि म्यूजियम में सिर्फ मुगलों का किस्सा नहीं, बल्कि आगरा के सभी नायकों की कहानी हो। यह ऐसा संग्रहालय हो जिसे देखककर मन राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत हो जाए।
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राणा सांगा की वीरता को दिखाया जाए म्यूजियम में
आज भी कुछ लोग हैं जो मुगलों की गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आए हैं। मुख्यमंत्री का निर्णय हमारे नायक शिवाजी महाराज का सम्मान है। इस म्यूजियम में स्वाभिमान का प्रतीक राणा सांगा की वीरता दिखाई जानी चाहिए। म्यूजियम में महाकवि सूरदास की कविताएं सुनाई दें, महाराज सूरजमल की महानता की जानकारी मिले। उम्मीद है कि म्यूजियम अद्भुत होगा। - चौधरी उदयभान सिंह, राज्यमंत्री
मुगलों की कहानी तक सीमित नहीं है आगरा का इतिहास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगल म्यूजियम का नाम छत्रपति शिवाजी के नाम पर किए जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है क्योंकि आगरा का इतिहास सिर्फ मुगलकाल की कहानी नहीं है। आगरा मुगलों के आने से बहुत पहले का है। आगरा से ही राधास्वामी पंथ का उद्भव हुआ, भगवान श्रीकृष्ण के पिता आगरा के ही थे, भगवान परशुराम ने यहां पर शिवलिंग की स्थापना की। म्यूजियम में राणा सांगा, वीर गोकुला जाट और गुरु तेग बहादुर की वीरता की कहानी दिखाई जाए। आगरा सूरदास, गालिब, द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी, गुलाब राय का शहर है, इनको म्यूजियम में जगह मिले। जंग ए आजादी का चमरौला कांड और हार्डी बम कांड भी दिखाया जाए। - एसपी सिंह बघेल, सांसद आगरा
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गर्व की अनुभूति कराएगा म्यूजियम
हमारे स्वामिभान के प्रतीक शिवाजी, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई हैं जिन्होंने आधीनता स्वीकार नहीं की और स्वराज्य के लिए संघर्ष किया। छत्रपति शिवाजी म्यूजियम भी हमारे स्वाभिमान का प्रतीक होगा। म्यूजियम का सिर्फ नाम ही नहीं बदला है, इसमें कई और बदलाव होंगे। हमें उम्मीद है कि इसमें सिर्फ मुगलों की कहानी नहीं होगी, आगरा के पौराणिक, धार्मिक महात्म्य के साथ ही राणा सांगा, शिवाजी महाराज की वीरता और जंग ए आजादी के नायकों की प्रेरक कहानियां भी होंगी। - राम प्रताप सिंह चौैहान, विधायक एत्मादपुर
समस्याओं से ध्यान हटाने को नाम का शिगूफा
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव शब्बीर अब्बास ने कहा कि अगर भाजपा को मुगलों के नाम से इतना ही परहेज है तो मुगलकालीन इमारतों ताजमहल, आगरा किला समेत अन्य स्मारकों से होने वाली आय से परहेज क्यों नहीं है। असल में सरकार का कोरोना काल में अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर ध्यान नहीं है। इनसे ध्यान हटाने को शिगूफेबाजी है नाम बदलना। पब्लिक को इससे बहुत ज्यादा सरोकार नहीं है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने कहा कि राममंदिर का मुद्दा खत्म होने के बाद भाजपा के पास अब कोई मुद्दा नहीं है। ऐसे में जब देश की जीडीपी लगातार गिर रही है। अपराध चरम पर पहुंच गए हैं। बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने को कभी चीन तो कभी हिंदू-मुस्लिम का मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
'शिव सेना से बिगड़ गई, अब शिवाजी का सहारा'
समाजवादी पार्टी के शहर अध्यक्ष वाजिद निसार ने कहा कि अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए भाजपा की सरकार नाम बदलने की राजनीति कर रही है। महाराष्ट्र में शिव सेना से भाजपा की बिगड़ चुकी है। ऐसे में जिस इमारत को सपा के मुखिया ने 90 फीसदी बनवा दिया, अब उसका नाम बदला गया है। अगर आगरा के विकास की चिंता थी तो एयरपोर्ट आगरा की जगह जेवर क्यों ले गए। आगरा में एयरपोर्ट बनवाकर उसका नाम शिवाजी महाराज पर रख सकते थे।
'नाम कुछ भी हो, काम होना चाहिए'
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान का कहना है कि नाम कुछ भी, काम होना चाहिए हमें म्यूजियम चाहिए, चाहे नाम कुछ भी हो। जो पर्यटक आएंगे, वह इसमें आगरा का पूरा इतिहास संस्कृति और कला को देखना चाहेंगे। जरूरत इस बात की है कि इसका काम जल्द पूरा हो ताकि कोरोना के बाद जो सैलानी आएं, उनके लिए एक नया आकर्षण हो।
टूरिज्म गिल्ड के उपाध्यक्ष राजीव सक्सेना ने कहा कि ताजमहल और आगरा को सीमित इतिहास के काल में बांधने की जरूरत नहीं है। पर्यटकों के आकर्षण के लिए एक म्यूजियम चाहिए। चाहे उसका नाम कुछ भी रख दिया जाए। पर्यटकों को इतिहास की जानकारी लेनी है, वह यहां दी जानी चाहिए।
'बजट के बिना महीनों से रुका पड़ा है काम'
टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशुद्दीन ने कहा कि महीनों से इसका काम रुका पड़ा है, बजट नही दिया। तय समय सीमा से 3 साल लेट है। जरूरत म्यूजियम के काम को पूरा करने की है। नाम में कुछ नहीं रखा। पर्यटकों को म्यूजियम से इतिहास और संस्कृति की जानकारी लेनी होती है।