आगरा में डाॅ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन और विधिक मामलों के लिए तैनात अधिवक्ता डाॅ. अरुण कुमार दीक्षित के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। विवि के पूर्व विधिक सलाहाकार डाॅ. अरुण कुमार दीक्षित को कार्य विरत किए जाने के बाद से घमासान मचा हुआ है। शनिवार को अधिवक्ता ने प्रेसवार्ता कर कमीशन मांगने के आरोप लगाए।
वहीं कुलपति प्रो. आशु रानी ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही राजभवन के अधिकारियों के खिलाफ अधिवक्ता की ओर से भ्रामक तथ्यहीन एवं दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने पर सार्वजनिक रूप से माफी न मांगने पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा है।
मारुति प्लाजा, संजय प्लेस में आयोजित वार्ता में अधिवक्ता डाॅ. अरुण कुमार दीक्षित ने कहा कि कुलपति प्रो. आशु रानी ने वर्ष 2011 से 2015 तक 76,64,890 रुपये का भुगतान किया गया। जबकि आरटीआई से मांगी गई जानकारी में 50 लाख का भुगतान बताया गया। इसमें भी 70 प्रतिशत कोर्ट के खर्चें हैं। 2.74 लाख रुपये के भुगतान के लिए अनुचित दबाव बनाने का आरोप भी निराधार है, इस भुगतान के लिए 30 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से भी की।
वहीं, कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि अधिवक्ता डाॅ. अरुण कुमार दीक्षित को विश्वविद्यालय की आंतरिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत गंभीर कदाचार एवं अनुशासनहीनता के कारण निष्कासित किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा यह निर्णय सभी नियमों, प्रक्रियाओं का पालन करते हुए तथ्यों के आधार पर लिया गया है। संबंधित अधिवक्ता को विश्वविद्यालय से पूर्व में भी निष्कासित किया जा चुका है।
अधिवक्ता भाषा की मर्यादा को भूलकर किसी भी सम्मानित व्यक्ति, पद तथा संस्थान को कुछ भी बोल रहे हैं। कमीशन मांगने के आरोपों को अनर्गल और मिथ्या करार देते हुए तत्काल सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है। बताया कि ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।