शिकायत पर नहीं हुई सुनवाई
वीरेश का कहना है कि प्रोफेसर अनिल वर्मा ने उनको बाहर जल रहे कागजों को देखकर आने को कहा। वो वहां पहुंचा तो कागज जल रहे थे। इसी दौरान कुलपति आ गए। साजिश के तहत उन्हें मार्कशीट और अन्य कागजात जलाने के मामले में फंसाकर नौकरी से निकाल दिया। वीरेश का कहना है कि भ्रष्टाचार और गलत कार्रवाई की शिकायत कुलाधिपति, पूर्व कुलपति, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से भी की।
अभी तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। अब उसे बहाल करने के लिए 10 लाख रुपये की मांग भी की जा रही है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। थाना हरीपर्वत पुलिस को इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख नियत की गई है।