आगरा। अवैध कब्जा हो या जलभराव। सड़क टूटी हो या भ्रष्टाचार। जनसुनवाई नहीं होती। फरियादी चक्कर लगाते रहते हैं। अफसर नोटिस-नोटिस खेल रहे हैं। जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध नोटिस के बाद कार्रवाई नहीं होती।
वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 30 से अधिक विभागों के करीब 100 अधिकारियों के विरुद्ध लापरवाही पर नोटिस जारी हुए। तहसीलदार से लेकर अधिशासी अभियंता, चिकित्सा अधिकारी व अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों का वेतन रोका गया। लेकिन, नतीजा शून्य रहा। जन शिकायतों के निस्तारण से फरियादी नाखुश हैं। हर महीने करीब दो हजार से अधिक आवेदक जन शिकायतों के निस्तारण पर निगेटिव फीडबैक दे रहे हैं। जिसका असर जिलाधिकारी कार्यालय की रैकिंग पर पड़ रहा है। रैकिंग में गिरावट के बाद नोटिस की खानापूर्ति हो रही है। वहीं, इस संबंध में नोडल अधिकारी जनसुनवाई प्रशांत तिवारी का कहना है कि नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं होने और जन शिकायत निस्तारण में सुधार नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अधिकारियों की रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। मासिक समीक्षा में इस बिंदु पर चर्चा भी होगी।
हर माह पांच हजार से अधिक शिकायतें
- तहसील, कलेक्ट्रेट, ब्लॉक से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक हर महीने जिले में करीब पांच हजार शिकायतें दर्ज हो रही हैं। जिनमें 40 प्रतिशत शिकायतों के निस्तारण से आवेदक असंतुष्ट हैं। समस्याएं भी जस की तस बनी रहती हैं। पिछले एक साल में किसी अधिकारी को लापरवाही या फर्जी निस्तारण पर निलंबित नहीं किया गया है।