मैनपुरी। जिले में आलू की खोदाई के साथ ही शीतगृह में भंडारण शुरू हो गया है। शीतगृह संचालकों द्वारा पहले से बुक कराए आलू का ही भंडारण किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। भंडारण के लिए शीतगृह के बाहर किसानों के आलू लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं। इससे जाम की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। वहीं जिला प्रशासन ने अब तक आलू भंडारण को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं।
जिले में लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान आलू की खेती करते हैं। मौसम ठीक रहने से इस बार उत्पादन भी बेहतर हुआ है। अनुमान के अनुसार लगभग छह लाख मीट्रिक टन तक आलू का उत्पादन हुआ है। अधिक कीमत मिलने की उम्मीद में किसान अपना आलू विक्रय करने की बजाए शीतगृह में भंडारित कर रहे हैं लेकिन शीतगृह संचालकों की मनमानी के चलते उन्हें परेशानी हो रही है। शीतगृह संचालक केवल उन्हीं किसानों का आलू भंडारण कर रहे हैं, जिन्होंने पहले से ही प्री-बुकिंग कराई है। अन्य किसानों को लाइन में लगने के बाद भी लौटाया जा रहा है। प्री-बुकिंग न कराने वाले किसान एक से दूसरे शीतगृह के चक्कर काट रहे हैं।
शीतगृह के बाहर सड़क पर आलू भंडारण के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली की लाइन लग रही है तो वहीं यातायात भी बाधित हो रहा है। शहर के राधारमन रोड स्थित रघुवीर कोल्ड स्टोरेज, भोगांव रोड पर बने शीतगृह के आगे ट्रैक्टरों की लाइनें लगी हुई हैं। अब तक आलू भंडारण को लेकर प्रशासन ने कोई गाइडलाइज जारी नहीं की है। अगर जल्द ही प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो किसानों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
85 प्रतिशत बुकिंग का है नियम
शीतगृह में आलू भंडारण को लेकर उद्यान विभाग की नियमावली का पालन करना होता है। इसके अनुसार कोई भी शीतगृह संचालक क्षमता के सापेक्ष केवल 85 प्रतिशत ही आलू भंडारण की प्री-बुकिंग कर सकता है। 15 प्रतिशत जगह उसे हर हाल में खाली रखनी होगी। ये अन्य किसानों व प्रशासन के निर्देशों के लिए आरक्षित रहती है।
आलू भंडार में नहीं होगी परेशानी
किसानों को आलू भंडारण में किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी। जिले में किसान अपनी सहूलियत के अनुसार शीतगृह में आलू भंडारित कर सकते हैं। अगर कहीं भी हाउसफुल अन्य समस्या आ रही है तो विभाग को सूचित करें। उनकी पूरी मदद की जाएगी।
-अनूप कुमार चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।
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हाईलाइर्ट्स
-22 हजार हेक्टेयर है जिले में आलू का क्षेत्रफल
-06 लाख मीट्रिक टन से अधिक होता है उत्पादन
-03 लाख मीट्रिक टन आलू का होता है भंडारण
-52 कोल्ड स्टोरेज जिले में हैं संचालित
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किसानों के लिए तो हमेशा परेशानी रहती है। पहले मौसम की मार से फसल को बचाएं इसके बाद शीतगृह में धक्के खाने पड़ते हैं। किसान कुछ नहीं कर सकते हैं।
-पप्पन कुमार, पॉवर हाउस रोड।
शीतगृह संचालक बुकिंग के नाम पर परेशान करते हैं। दरअसल ये उनका एक हथकंडा है जिससे जल्द से जल्द किसान उनके यहां आलू भंडारण के लिए लाएं।
-गब्बर सिंह, वीरपुर।
जब भी आलू का भंडारण शुरू होता है तो किसानों को परेशानी होती है। प्रशासन भी मदद नहीं करता है। आलू भंडारण के लिए कई-कई दिन लाइन में लगना पड़ता है।
-हरगोविंद, अहमदपुर।
आलू भंडारण में सबसे बड़ी समस्या है कि संचालक न तो निर्धारित समय बताते हैं और न ही लाइन से आलू भंडारित कराते हैं। किसान अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं।
-मोनू, नगला बहोरी।