पूस की सर्द रात में बंद कमरे में भी दरवाजे या खिड़की के किसी कोने से आने वाली सर्द हवा परेशान कर उठती है। ऐसे में खुले आसमान के नीचे ये सर्दी कितना सितम करती होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। लेकिन विकास भवन में कुछ किसान ऐसी ही पूस की 14 रातें खुले आसमान के नीचे बिता चुके हैं। ये सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि वे सहकारी समितियों के गोदामों के निर्माण में हुए धांधली में कार्रवाई किए जाने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
किसान नेता श्याम सिंह चाहर और दिलीप सिंह ने किसानों के साथ मिलकर सहकारी गोदामों के निर्माण में 4.12 करोड़ की धांधली का मामला उठाया था। प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया तो उन्होंने विकास भवन में खुले आसमान के नीचे ही अनशन शुरू कर दिया। फिर भी बात नहीं बनी तो बीते नौ दिनों से अन्न और जल का भी त्याग कर दिया। इस बीच श्याम सिंह चाहर और दिलीप सिंह को हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती भी कराया गया, लेकिन वे फिर वापस अनशन स्थल पर लौट आए। खुले एक तरफ किसान नेता प्रशासन से लड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पूस की सर्द रात से भी उनकी जंग जारी है।
14वें दिन भी लगातार किसान नेता अनशन पर डटे रहे। किसानों का कहना है कि कार्रवाई होने तक न वे डिगेंगे। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने बताया कि प्रशासन लगातार जांच पूरी होने की बात कह रहा है। अगर जांच पूरी हो गई है तो उसे सार्वजनिक कर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।