शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में दमकते श्वेत और संगमरमरी ताजमहल के साथ सेल्फी लेने की चाहत पूरी नहीं हो सकी। दूसरे दिन भी चांद बादलों में छिपा रहा। सैलानियों ने मोबाइल कैमरे से सेल्फी तो ली लेकिन ताज का अक्स खिलकर सामने न आ सका।
यमुना नदी के किनारे एडीए व्यू पॉइंट के सैलानी हों या ताज के अंदर रॉयल गेट से दीदार के लिए पहुंचे सैलानी। किसी को उम्मीद के मुताबिक ताजमहल का दीदार नहीं हो सका। एएसआई के टिकट पर पूरे 400 सैलानी बृहस्पतिवार को आए। व्यू पॉइंट पर 125 सैलानियों ने ताज को रात में निहारा। रात 11 बजे के बाद कुछ रोशनी बढ़ी और बादल हटे, तब ताज नजर आया।
जैसा सुना, वैसा न पाया
जयपुर से आईं तन्वी अग्रवाल ने बताया कि जैसा सुना था, चांदनी रात में ताज को वैसा न पाया। सेल्फी लेने पर ताजमहल ही नजर नहीं आया। ताज को देखने के लिए दूरी ज्यादा है। मुख्य गुंबद तक जाने की अनुमति होनी चाहिए। रायपुर से आए राजेंद्र सिंह ने बताया कि मथुरा के मंदिरों के बाद ताजमहल देखने आए थे। बचपन में एक बार ताज पर चमकी मेले में आए थे। तब लाखों की भीड़ थी। अब नजारा बदल गया है। पहले गुंबद तक घूमे थे, पर इस बार 15 मिनट भी नहीं रुकने दिया।