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‘निधि हो बंद, प्रत्याशी हो ग्रेजुएट’

Thu, 12 Jan 2017 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
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अमर उजाला चुनावी मंथन में शहर के उद्यमियों और व्यापारियों ने उठाई आवाज, - फोटो : अमर उजाला
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शहर के उद्यमियों और व्यापारियों ने अमर उजाला के चुनावी मंथन में एक सुर से सांसद-विधायक निधि बंद होने की मांग उठाई। चुनाव लड़ने वालों की शैक्षिक योग्यता कम से कम ग्रेजुएट करने और नेताओं के रिटायरमेंट की भी उम्र तय करने की आवाज इस फोरम पर उठी। कभी जाति तो कभी धर्म तो कभी बिरादरी के नाम पर चुने गए प्रत्याशियों के रिजल्ट को देख चुके व्यापारियों के मुताबिक अब परिवर्तन का वक्त है। पांच साल तक हाथ जोड़कर अपनी समस्याएं सुनाने के बाद भी जन प्रतिनिधियों ने व्यापारियों को ठेंगा ही दिखाया है। अब बारी उनकी है। इस बार वोट पार्टी नहीं, बल्कि ऐसे चेहरों को देंगे, जो उनके साथ उनकी समस्या में हाथ से हाथ मिलाकर खड़ा रहे।
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कमजोर राजनीति से आगरा के व्यापार ने केवल खोया है, पाया कभी नहीं। दाल मिलें, ईंट भट्ठे, फाउंड्री से लाखों लोग बेरोजगार हो गए। व्यापारी पलायन कर रहे हैं और अफसर आगरा में बस रहे हैं। चुनाव लड़ने को शैक्षिक योग्यता ग्रेजुएट रखी जाए।
टीएन अग्रवाल, अध्यक्ष, आगरा व्यापार मंडल
 
नोटबंदी में पूरा ट्रेड परेशान रहा, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि ने आवाज नहीं उठाई। उद्यमियों की समस्याओं में जनप्रतिनिधि हमारे साथ खड़े नहीं होते। इस चुनाव में परिवर्तन की शुरूआत करनी होगी। जो बेहतर प्रत्याशी हों, उन्हें ही चुनेंगे।
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अशोक गोयल, अध्यक्ष, नेशनल चेंबर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स

विधायक निधि, सांसद निधि तुरंत खत्म होनी चाहिए। कमीशनखोरी की यह सबसे बड़ी वजह है, जिसने जनप्रतिनिधियों को भटकाया है। राजनीति में उम्र की सीमा और रिटायरमेंट भी होना चाहिए। चुनाव सुधार की जरूरत है।
मुरारी लाल फतेहपुरिया, अध्यक्ष, श्री सराफा कमेटी

रबर डैम हो या एयरपोर्ट। इन वादों के पूरे न होने से पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ है। एक हजार रुपये का टिकट लेकर पर्यटक ताज के पीछे गंदा नाला देखते हैं तो शर्म आती है। सांसद, विधायक लिखित देने के बाद भी पांच साल बाद उन्हीं मुद्दों पर वोट मांगेंगे।
रमेश वाधवा, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन

चुनाव बाद हर बार व्यापारी ठगे गए हैं। प्रत्याशी आगरा के विकास का चार्टर तैयार करें। उनकी हर छमाही जवाबदेही तय हो। 50 साल से चले आ रहे मुद्दों को वह कैसे पूरा कराएंगे, प्रत्याशियों को यह बताना चाहिए।
चरनजीत थापर, अध्यक्ष, आगरा मंडल व्यापार संगठन

आगरा का दुर्भाग्य है कि मजबूत नेतृत्व कभी नहीं मिला। सत्ता में हों या विपक्ष में, दमदारी से आवाज उठाकर विकास के काम करा ही नहीं पाए। पांच साल जनप्रतिनिधि रहने के बाद ब्लू प्रिंट मांगते हैं, जैसे कुछ जानते ही नहीं। वोटर बदलाव लाकर दिखाएगा।
मनीष अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चेंबर

आगरा के जनप्रतिनिधियों को देख लें। अपना करियर तो बनाया, लेकिन शहर नहीं संवारा। उद्योग-व्यापार के लिए कोई एक काम तक नहीं किया। अब इस चुनाव में व्यापार, एयरपोर्ट, हाईकोर्ट के मुद्दे पर दृष्टिकोण देखने के बाद ही वोट देंगे।
जितेंद्र त्रिलोकानी, उपाध्यक्ष, शू मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन

गैर जिम्मेदार, वादाखिलाफी करने वाले नेताओं को चुनने में दोषी हम ही हैं। प्रत्याशी की जगह पार्टी को वोट देने की प्रवृत्ति से अच्छे लोग नहीं चुने गए। ये परिवर्तन का चुनाव है। मेडिकल क्षेत्र की आवाज हमारे किसी प्रतिनिधि ने उठाई नहीं।
महेश अग्रवाल, अध्यक्ष, दवा व्यापार एसोसिएशन।

कभी आगरा में तीन दिन पर्यटक रुकते थे, लेकिन अब नाइट कल्चर नहीं तो सुबह आकर शाम को जा रहे हैं। इससे शहर का ही नुकसान है। कई नेता पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं, लेकिन ट्रेड के लिए सुविधाओं पर काम नहीं किया।
अवनीश शिरोमणि, महासचिव, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन।

शहर में मूल सुविधाएं ही नहीं हैं। विधायक हमारे दुख दर्द और समस्याएं उठाना तो दूर, शहर के विकास के काम तक नहीं करा पाते। लोगों को अब अच्छे लोगों को चुनना होगा। आखिर पांच साल बाद उनकी बारी अब आई है।
तारा चंद्र गोयल, महामंत्री, आगरा क्लॉथ मर्केटाइल एसोसिएशन।

व्यापारी 31 तरह के टैक्स देता है, लेकिन अब सबसे बड़ा चोर साबित किया जा रहा है। कोई जनप्रतिनिधि व्यापारी की आवाज नहीं उठा रहा। व्यापारी आयोग बनाने के वादे हवा हो गए। पेयजल संकट इस चुनाव में बड़ा मुद्दा होगा।
देवेंद्र गोयल, मंत्री, श्री सराफा कमेटी।

चुनाव में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बैराज और हाईकोर्ट मुद्दा रहेगा। बैराज बनने से पेयजल समस्या कम होगी। यमुना में केवल 10 फुट सिल्ट हटा दी जाए तो नदी भी साफ हो जाएगी।
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राजू मेहरा, महामंत्री, स्वर्णकार समिति
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