दिल्ली रेप मामले पर बनी विदेशी डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ प्रतिबंध के बावजूद आंवलखेड़ा के रूपधनू में ग्रामीणों को दिखाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई जांच पर अटक गई है। छांव संस्था और शीरोज हैंग आउट कैफे से जब्त किए गए लैपटॉप में फिल्म की क्लिपिंग मिली है, जिसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। एसपी ग्रामीण बबीता साहू का कहना है कि लैब की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बता दें, रविवार शाम सात बजे शीरोज हैंग आउट कैफे के पीआर मैनेजर केतन दीक्षित और राहुल कुमार ने आंवलखेड़ा के गांव रूपधनू में प्रोजेक्टर के जरिए लोगों को डॉक्यूमेंट्री दिखाई थी। देखने वालों में ज्यादातर बच्चे थे। ग्रामीणों को इस पर प्रतिबंध की जानकारी नहीं थी। मामले में सोमवार को केतन और राहुल को थाने लाकर पूछताछ की गई थी। उनसे लैपटॉप, प्रोजेक्टर, अन्य उपकरण और संस्था से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। केतन दीक्षित ने डॉक्यूमेंट्री के प्रतिबंध का विरोध करते हुए गांव-गांव में प्रदर्शन का एलान किया था। इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस का कहना है कि लैपटॉप में एक फिल्म की क्लिपिंग मिली है। यह डॉक्यूमेंट्री से जुड़ी है या नहीं, इसकी जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। एसपी बबीता साहू का कहना है कि जब तक यह पुष्ट नहीं होता कि जो फिल्म गांव में दिखाई गई वह प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री है कि नहीं, तब तक पुलिस अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है।
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बच्चों को फिल्म दिखाने में मुकदमा क्यों नहीं?
रेप पर बनी फिल्म का प्रदर्शन बच्चों के सामने भी किया गया था, मगर पुलिस ने इसे भी संज्ञान में नहीं लिया। गांव मेें जांच के लिए पहुंचे पुलिस अधिकारी के सामने बड़े तो कुछ नहीं बोले थे, लेकिन बच्चों ने ऐसी फिल्म दिखाए जाने की पुष्टि की थी। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
फिल्म प्रदर्शन में मदद करने वालों ने साधी चुप्पी
गांव रूपधनू में फिल्म दिखाने के मामले में ग्रामीण खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं, मगर चर्चाओं का दौर चल रहा है। जिन लोगों ने गांव में फिल्म दिखाने में संस्था के लोगों की मदद की, अब उन्हें भी कार्रवाई का डर सता रहा है। उन्होंने चुप्पी साध ली है।