भाई को साइकिल पर बैठाने के बाद घर के लिए चली थी। कुछ आगे पहुंचे ही थे कि सामने से बस आ गई। कुछ कर पाती, तब तक बस ने टक्कर मार दी। छिटककर दूर जा गिरी, जबकि सौव्य बस की चपेट में आ गया। आंखों के सामने अब भी हादसे का मंजर है। जान कैसे बच गई, मुुझे पता नहीं। ऐसा कहते हुए कक्षा नौ की छात्रा करीना रोने लगती है। वह बस एक ही बात बोल रही थी कि भाई की जान चली गई। वो भी बच जाता।
बाबा की तिवरिया, फतेहाबाद पर हुए हादसे में छात्रा करीना भी घायल हुई है। उसने बताया कि मौत को काफी करीब से देखा। सोचा नहीं था कि जिंदा बच जाऊंगी। बस के रूप में मौत टकराई थी। वह छिटक कर दूसरी तरफ गिर गई, लेकिन पीछे बैठा सौव्य इसकी चपेट में आ गया।
करीना ने कहा कि जैसे ही बस उसके नजदीक आई, उसकी आंखें बंद हो गईं। उसको नही पता कि क्या घटना हुई थी। काफी देर बाद वह सड़क से नीचे खड्ड में बैठी हुई थी। उसे पूरी तरह से होश नहीं था। कुछ लोगों ने उसे उठाकर मोटरसाइकिल पर बैठाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उसे काफी देर बाद होश आया। अस्पताल में भी वह डर से कांप रही थी। वह बोलने में असहज महसूस कर रही थी।
बस के नीचे दबीं 3 साइकिलें, 4 स्कूल बैग
बस की चपेट में और भी छात्र आ गए थे। उनकी 3 साइकिलें बस के नीचे आ गईं। वहीं 4 स्कूली बैग भी पड़े हुए बस के नीचे मिले। पेड़ से टकराकर बस रुक गई। नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। बस में सवार लोग भी हादसे का शिकार हो सकते थे।