मैनपुरी। कोरोना संक्रमण के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने खजाना खोला था। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी। लेकिन इतनी बड़ी धनराशि में से ढाई माह बाद भी एक रुपया भी खर्च न कर पाया। यह लापरवाही तब है जब राज्यसभा सांसद इसी के चलते निधि वापस ले चुके हैं।
अप्रैल में जिले के विधायक-सांसदों के अलावा अन्य ने भी जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए निधि से 1.45 करोड़ की धनराशि दी थी। इसमें सदर विधायक राजकुमार यादव, करहल विधायक सोबरन सिंह यादव, राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव और सपा सांसद मुलायम सिंह यादव ने 25-25 लाख रुपये दिए थे। वहीं भोगांव विधायक रामनरेश अग्निहोत्री, किशनी विधायक बृजेश कठेरिया, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, एमएलसी अरविंद यादव ने दस-दस लाख रुपये दिए थे। इसके साथ ही एमएलसी मथुरा उदयवीर सिंह ने पांच लाख रुपये दिए थे। कुल मिलाकर 1.45 करोड़ रुपये की धनराशि मुख्य विकास अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को सौंपी थी। यह धनराशि सौंपे लगभग ढाई माह का समय बीत चुका है। लेकिन इसमें से विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
सांसद ने वापस ले ली थी धनराशि
सबसे पहले कोरोना संक्रमण फैलने के बाद वेंटीलेटर या डायलिसिस यूनिट के लिए राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने 25 लाख रुपये की निधि दी थी। इसके बाद भी जब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान नहीं दिया तो बीते माह उन्होंने धनराशि वापस करने के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया था कि सीएमओ से कई बार बात करने के बाद भी जब उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा।
ये कराई जा सकती हैं व्यवस्थाएं
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वेंटीलेटर की व्यवस्था
- जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना
- सैनिटाइजिंग रूम का निर्माण
- बर्न वार्ड का अपग्रेडेशन
- स्वास्थ्य विभाग के पास सरकारी बजट उपलब्ध है। जरूरत के हिसाब से जनप्रतिनिधियों की ओर से दी गई धनराशि का इस्तेमाल किया जाएगा। - डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।