वृंदावन (मथुरा)। नए साल के पहले दिन श्रीबांकेबिहारी की नगरी में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ श्रीबांकेबिहारी और श्रीराधारानी की जय-जयकार के स्वर गूंजने लगे। प्रात:काल की बेला में ठाकुर जी के दर्शन कर भक्त आनंदित हो गए। गलियों से लेकर मंदिर तक लोगों का हुजूम देखने को मिला। वहीं इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
साल 2021 की शुरुआत के लिए कान्हा के लाखों भक्तों का हुजूम शुक्रवार को धर्मनगरी वृंदावन में नजर आया। साल के पहले दिन सूरज की किरणों के निकलते ही भक्तों के कदम ठाकुर बांकेबिहारी के द्वार की ओर बढ़ने लगे। देखते ही देखते मंदिर खुलने से पहले ही भक्तों की लंबी कतार लग गई। जैसे-जैसे समय बीता भीड़ का दबाव बढ़ता गया। दोपहर के वक्त तो भीड़ इस कदर हो गई कि लोग व्याकुल होने लगे। इस दौरान श्रीराधारानी और श्रीबांकेबिहारी की जय-जयकार लोगों में उत्साह भर रही थी।
भक्तों को दर्शन के बाद सुरक्षागार्ड तत्काल बाहर निकाल रहे थे, फिर भी लोगों में अपने आराध्य के दीदार करने की आपाधापी मची रही। लंबी कतार से लेकर मंदिर में दर्शन तक कहीं सोशल डिस्टेंसिंग नजर नहीं आई। यहां तक कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी फेल हो गई। श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए घंटों की दुश्वारियों से गुजरने वाले भक्त दर्शन के बाद आनंदित नजर आए। शाम के वक्त भी दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों का यही हाल रहा। दर्शनार्थियों की कतार हरिनिकुंज तक पहुंच गई।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर की राह पकड़ी
नए साल के पहले दिन वृंदावन पहुंचे भक्तों के कदम सुबह के समय श्रीबांकेबिहारी मंदिर की राह पकड़ते नजर आए। इसके बाद निधिवन, सेवाकुंज, श्रीगोविंददेव, रंगजी आदि मंदिरों के दर्शन किए तो शाम को प्रेम मंदिर का आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींचता दिखाई दिया।
लड्डू गोपाल की बांकेबिहारी से कराई भेंट
बाहर से आए अनेक भक्त घर से लड्डू गोपाल के साथ आए। यहां मंदिर में अपने लड्डू गोपाल की भेंट श्रीबांकेबिहारी से कराई। चंदन का तिलक लगाया और फूलों की माला पहनाई। यहां तक कि बाजार से ठाकुर जी के लिए पोशाक भी खरीदकर ले गए। फरीदाबाद से आई रंजनी ने अपने लड्डू गोपाल को श्रीबांकेबिहारी के दर्शन कराए। चंडीगढ़ की मालती यहां से घर के लिए ठाकुर जी ले गईं।
वृंदावनवासियों ने लगाई परिक्रमा
नए साल के पहले दिन श्रीबांकेबिहारी मंदिर में भीड़ अधिक होने की स्थिति में स्थानीय लोग दर्शन से बचते हुए नजर आए। ऐसे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने वृंदावन की परिक्रमा की। महिला, पुरुष और बच्चों के साथ साधु-संतों ने भी परिक्रमा की। परिक्रमा का यह दौर देर शाम तक चला। खासकर दोपहर के वक्त बड़ी संख्या में लोग परिक्रमा को पहुंचे।