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खतरे में बचपनः पति-पत्नी की कलह से मानसिक तनाव में आ रहे बच्चे, मनोचिकित्सक की रिपोर्ट ने चौंकाया

Mon, 23 Dec 2019 04:20 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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child - फोटो : pixa
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पढ़ाई में पिछड़ना, चोरी करना या फिर टीवी ज्यादा देखना...माता-पिता को लगता है कि बच्चा बिगड़ रहा है। यह सोच भी नहीं पाते कि इसकी वजह उनका आपसी झगड़ा है, जो वे बच्चे के सामने करते हैं। यह हकीकत तब सामने आती है जब बच्चे को मनोचिकित्सक के पास लाया जाता है।
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दरअसल मां-बाप के झगड़े से बच्चे को मानसिक तनाव होता है जिसकी वजह से उसके व्यवहार में बदलाव आता है। इतना ही नहीं अगर कोई गर्भवती घरेलू हिंसा का शिकार हो तो, गर्भस्थ शिशु पर गंभीर असर पड़ता है। 

मनोचिकित्सक बताते हैं कि मां-बाप के झगड़े का असर पांच-छह साल तक के बच्चों पर ज्यादा पड़ता है। वे उनके सामने झगड़ते हैं तो इसका बच्चों के पूरे जीवन पर प्रतिकूल असर रहता है। उनका मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है।
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आगे चलकर इन बच्चों के असामान्य या असामाजिक व्यक्तित्व के रूप में विकसित होने का खतरा भी ज्यादा होता है। गर्भवती के साथ मारपीट-झगड़े का असर तो और भी घातक होता है। इसकी वजह से पैदा होने वाला शिशु दिमागी और शारीरिक रूप से कमजोर हो सकता है।  
 

गर्भस्थ शिशु के दिमाग पर पड़ता है प्रभाव
बच्चों का दिमाग बड़ों की अपेक्षा जल्दी सीखता है। जब बच्चा गर्भ में होता है तो पूरी तरह मां से ही जुड़ा होता है। गर्भावस्था में मारपीट होती है तो महिला की भावनाएं बच्चे के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। 

पति-पत्नी में झगड़े भी खूब
ऐसे दंपतियों की कमी नहीं जो आपस में झगड़ते रहते हैं। ये मामले पुलिस और परामर्श केंद्र तक भी पहुंचते हैं। इस साल सिर्फ दिसंबर में आशा ज्योति केंद्र में आए इस तरह के झगड़े के मामलों में 36 प्रतिशत गर्भवतियों और 40 फीसदी छह साल तक के बच्चों की मां के साथ हुए। महिला थाने में दर्ज मामलों में यही प्रतिशत क्रमश: 56 और 62 और परामर्श केंद्र में 60 और 65 रहा। 
 

केस 1: कुछ याद नहीं रहता
छह साल का बच्चा स्कूल और ट्यूटर द्वारा पढ़ाई गई किसी भी बात को याद नहीं रख पाता था। परेशान माता-पिता ने बच्चे को डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बच्चे से जब अकेले में बात की तो पता चला उसकी समस्या की जड़ में माता-पिता रोज-रोज का झगड़ा है।  

केस-2: तेज आवाज से डर
पांच साल का बच्चा हर वक्त सहमा-सहमा रहता है। तेज आवाज में बोला जाए तो रोने लगता है। हालांकि बाकी व्यवहार सामान्य बच्चों की तरह ही है। मनोचिकित्सक को दिखाने पर मालूम हुआ यह पिता द्वारा उसकी मां के साथ गाली-गलौज और मारपीट करने का असर है।
 
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आईक्यू होता है कम
गर्भावस्था में अगर मां के साथ मारपीट होती है तो इसका शारीरिक व मानसिक रूप से बच्चे पर असर पड़ता है। अगर गर्भावस्था में मां के साथ लगातार हिंसा हो रही है तो बच्चे का आईक्यू सामान्य से कम भी हो सकता है। -दिनेश राठौर, मनोचिकित्सक

कुंठित होते हैं बच्चे
चाहे बच्चा गर्भ में हो या पांच-छह साल तक का, मां के साथ हिंसा होती है तो इसका पूरा प्रभाव उस पर पड़ता है। अगर मां के साथ पिता मारपीट करता है तो बच्चे कुंठित हो जाते हैं और सामान्य बच्चों से अलग व्यवहार करते हैं। -यूसी गर्ग, मनोचिकित्सक 
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