फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी सहायता

विज्ञापन
विज्ञापन
मैनपुरी। जेल में मंगलवार को वर्चुअल विधिक साक्षरता शिविर लगाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बंदियों को विधिक सेवा योजना 2015 तथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की जानकारी दी।
विज्ञापन

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार चौधरी ने कहा विधिक सेवा योजना 2015 से संचालित है। इस योजना में महामारी के दौरान अनाथ बच्चों के भरण पोषण, शिक्षा, चिकित्सा का प्रावधान है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में भी इसी तरह की व्यवस्था है। इसमें कोरोना संक्रमण से अनाथ हुए बच्चों को सहायता दी जा रही है। ऐसे बच्चे जिनके माता, पिता, अभिभावक में से किसी एक की मृत्यु एक मार्च 2020 से पहले और दूसरे की मृत्यु एक मार्च 2020 के बाद हुई है वह पात्र होंगे।
देहात क्षेत्र में ग्राम विकास, पंचायत अधिकारी, ब्लॉक, प्रोबेशन कार्यालय, शहरी क्षेत्र में लेखपाल, तहसील, प्रोबेशन कार्यालय में आवेदन जमा किए जाएंगे। किसी तरह की समस्या होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। इस मौकेे पर जेल अधीक्षक हरीओम शर्मा, जेलर जेपी दुबे, प्राधिकरण कार्यालय सहायक देवेंद्र सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन

बंदियों की समस्याओं का समय से करें निस्तारण
प्राधिकरण के सचिव ने जेल का वर्चुअल निरीक्षण भी किया। उन्होंने बंदियों की शिकायतें और समस्यायें सुनीं। जेल अधीक्षक को समस्याओं का समय से निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षक से कहा बंदियों के भी मौलिक अधिकार होते हैं। जेल में उनका हनन नहीं होना चाहिए। साथ ही कोरोना संक्रमण के दौरान बंदी के बीमार होने पर तत्काल उसका उपचार कराने और नए बंदियों को 14 दिन तक अलग बैरक में रखने के निर्देश दिए।
शीघ्र भेजें सूचीबद्ध मामले
मैनपुरी। दीवानी में 10 जुलाई को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष तेजप्रताप तिवारी जिला जज ने निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए सूचीबद्ध किए गए मामलों की सूची अतिशीघ्र विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जमा कराई जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया राष्ट्रीय लोक अदालत का निर्णय सर्व मान्य होता है। इस निर्णय को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। सभी विभागों और न्यायालयों को सूचीबद्ध किए गए मामलों की सूची अतिशीघ्र विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जमा कराने को कहा है। इससे सूची को समय से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में भेजा जा सके। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें