आगरा में मुगल बादशाह औरंगजेब की कैद से निकलने में छत्रपति शिवाजी महाराज 17 अगस्त 1666 को कामयाब हुए थे। इसी शौर्य को याद करने के लिए शिवाजी के वंशज गरुड़क्षेप यात्रा निकाल रहे हैं। आगरा से राजगढ़ तक 1250 किमी लंबी यात्रा में छत्रपति के सेनापतियों के 14वें वंशज हिस्सा लेने आगरा आए हैं। कोठी मीना बाजार मैदान पर स्मारक बनाने की योजना 6 साल से चल रही है। म्यूजियम 8 साल से अधूरा है। महाराष्ट्र सरकार ने दो साल पहले जो प्रतिमा भेंट की, वह भी प्रदेश सरकार आगरा में नहीं लगवा सकी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में मुगल म्यूजियम को स्टेट ऑफ द आर्ट का दर्जा देते हुए ताजमहल पूर्वी गेट रोड पर निर्माण शुरू कराया था। प्री-कास्ट तकनीक से तैयार किए जा रहे म्यूजियम का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स कंपनी कर रही थी, लेकिन वर्ष 2016 के अंत में इसका काम बंद हो गया।
चुनाव के बाद सरकार बदलते ही मुगल म्यूजियम का नाम बदल दिया गया, लेकिन 8 साल से काम बंद है। 140 करोड़ रुपये की योजना बढ़कर 182 करोड़ हो गई, पर प्रदेश सरकार ने एक पैसा भी बजट में नहीं दिया। इस बार बजट जारी किया लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
स्मारक के लिए जमीन नहीं मिली
वर्ष 2017 में पहली बार तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने की पैरवी की। उनकी मंशा के बाद साल 2018 में छत्रपति को जिस जगह बंदी बनाकर रखा गया, उस कोठी मीना बाजार को स्मारक में बदलने और 100 फीट ऊंची अश्वारोही प्रतिमा लगाने की योजना बनी। जमीन संबंधी विवादों के कारण 6 साल से एक इंच जमीन भी अधिगृहीत नहीं हो सकी, न ही अश्वारोही प्रतिमा का ही निर्माण शुरू हो पाया।
म्यूजियम देखने आते हैं सैलानी
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि हैदराबाद समेत शहरों में म्यूजियम देखने ही हजारों सैलानी आते हैं, पर यहां 8 साल से काम बंद है। छत्रपति शिवाजी के नाम पर म्यूजियम का नाम तो रख दिया, पर सम्मान नहीं दे रहे। स्मारक और म्यूजियम दोनों जगह एक ईंट भी इन सालों में नहीं रखी गई।