उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बाह क्षेत्र में दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों को नया जीवन देने वाली चंबल नदी खतरे में पड़ी इंडियन स्कीमर के लिए भी संजीवनी बनी है। घड़ियालों की तरह ही इस चिड़िया की भी संख्या यहां बढ़ रही है। शनिवार को इनकी नेस्टिंग का काम पूरा हो गया। मई में इंडियन स्कीमर और जून में घड़ियालों के नेस्ट से बच्चे निकलेंगे। नेस्ट की वन विभाग की टीम दिन रात निगरानी कर रही है।
1979 में दुनिया में लुप्तप्राय घड़ियालों के संरक्षण के लिए चंबल नदी को चुना गया। 1981 में घड़ियाल सेंक्चुअरी अस्तित्व में आई। ताजा सर्वे में घड़ियाल (वैज्ञानिक नाम गेविएलिस गंगेटिक्स) की आबादी 2108 हो गई है। पिछले साल इनका कुनबा 2014 था। मद्रास क्रोकोडाइल बैंक की टीम घड़ियालों के जीवन चक्र पर शोध कर रही है।
घड़ियाल इकोलॉजी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे शोधार्थियों को बर्लिन चिड़ियाघर से अत्याधुनिक कश्ती मिली है। शोधार्थी जैलाबुद्दीन ने बताया कि अत्याधुनिक पोर्टेबल कश्ती, दो इलेक्ट्रिक ट्रोलिंग मोटर्स, रिचार्जेबल बैटरी और आवश्यक सामान से लैस है। इस कश्ती की मदद से नेस्टिंग सीजन में चंबल नदी के टापू और दोनों किनारों के नेस्टों तक पहुंचने एवं शोध कार्य आसान हो जाएगा।