कासगंज। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। इस पर्व पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महासंगम का समापन 27 मार्च को राम नवमी के साथ होगा। जनपद में चैत्र नवरात्र के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
श्रद्धालु पूरे मनोयोग से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की तैयारियों में जुटे हैं। भक्त नौ दिनों तक व्रत-उपवास रखकर विधि-विधान से शक्ति स्वरूपा मां की अराधना करेंगे। शहर के प्रमुख मंदिरों में साफ-सफाई और आकर्षक सजावट का कार्य पूरा हो गया है। पूजा सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी घट स्थापना और पूजा के लिए विशेष तैयारियां की हैं। चारों ओर भक्ति का वातावरण बना हुआ है। मंदिरों के व्यवस्थापक भी सक्रिय हैं और संभावित भीड़ के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। चामुंडा मंदिर पर लगने वाले मेला के लिए दुकानदार भी तैयारियों में जुटे हैं। शांतापुरी स्थित माता काली मंदिर सहित अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। गली-मोहल्लों में स्थापित देवी मंदिरों में भी पूजा-अर्चना की सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। मंदिरों में लगातार सफाई, धुलाई और सजावट का कार्य किया गया।
घट स्थापना मुहूर्त :
शुभ बेला - सुबह 06:50 से 07:20 बजे तक
चंचल बेला - सुबह 11:15 से दोपहर 12:20 बजे तक
अभिजीत बेला - दोपहर 12:20 से 1:20 बजे तक
लाभ-अमृत बेला - दोपहर 12:50 से 3:50 बजे तक
तिथि अनुसार पूजा और उत्सव :
19 मार्च -प्रतिपदा-घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
20 मार्च-द्वितीया- ब्रह्मचारिणी पूजा, चंद्र दर्शन
21 मार्च -तृतीया-चंद्रघंटा पूजा, गौरी पूजा
22 मार्च- चतुर्थी- कूष्मांडा पूजा
23 मार्च-पंचमी-स्कंद माता पूजा
24 मार्च-षष्ठी- कात्यायनी पूजा
25 मार्च- सप्तमी- कालरात्रि पूजा
26 मार्च-अष्टमी- महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
27 मार्च-नवमी- सिद्धदात्री पूजा, राम नवमी
घट स्थापना की विधि :
चैत्र नवरात्र में घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसके लिए घर के मंदिर के पास ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) का चयन करें। सबसे पहले स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद जमीन पर मिट्टी की परत बिछाकर उसमें जौ बोएं। अब कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में मौली बांधें। जिस स्थान पर कलश स्थापित करना है, वहां कुमकुम या रोली से अष्टदल कमल बनाएं। कलश में गंगाजल भरकर उसमें इत्र, सुपारी, दुर्वा आदि डालें। इसके बाद कलश को आम के पत्तों से सजाकर ऊपर नारियल स्थापित करें।