बाह। गांवों में रविवार को कहीं फसलों की रखवाली के लिए किसान बाड़ लगाते मिले तो कुछ खेतों से पशुओं को हांक रहे थे। पहरेदारी के बाद भी फसलें नहीं बच पाने से वे किसान दुखी हैं। धनियापुरा के गंदर्भ सिंह, जयराम सिंह, कैंजरा रोड के अजय चौधरी, बिजकौली के रमेश बोले कि गेहूं अर आलू खूंद दए, सरसों चरि लई... बाड़ कौं तोड़ि कें घुसि जात हैं, दिन-रात भगावत हैं, तौऊ किसान मिटि गऔ।
किसानों ने बताया कि रात में मचान पर सोकर और दिन में मेड़ पर दौड़कर पशुओं को हांकते हैं, फिर भी फसल नहीं बचा पा रहे हैं। किसानों ने रोष जताया कि सरकार दो साल से कुकथरी में गोशाला बनवा रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। किसान छोटेलाल, रामनरेश, श्रीभगवान, रामौतार, अनिल, केदारनाथ, अजयपाल आदि ने बताया कि गोशाला के बिना आवारा पशुओं के उत्पात से मुक्ति नहीं मिलेगी।
घुमंतू की आड़ में छोड़ देते हैं पालतू जानवर
घुमंतू पशुओं की आड़ में क्षेत्र में पालतू गायें भी छोड़ी जा रही हैं। बिजौली, धनियापुरा, समोखीपुरा, जरार, पडुआपुरा, तेजसिंह पुरा, पटकुइयनपुरा, धोबई, मंगदपुर, नरहोली आदि गांवों में यह समस्या भी किसानों ने बताई। किसान सुरेंद्र सिंह, भरत सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, जोधाराम, कमलेश, सुनील, महेश चंद्र ने बताया कि विरोध करने पर पशुपालक झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं।
सड़क से लेकर खेतों तक बने खतरा
खेत से लेकर सड़क तक घुमंतू पशुओं से जान का खतरा है। 18 जनवरी को विक्रमपुर गांव में खेत की रखवाली कर रहे किसान सोवरन सिंह, धमन सिंह, मुन्नालाल पर सांड़ ने हमला कर दिया था, मुश्किल से उनकी जान बची। 17 फरवरी को खेड़ा राठौर में आवारा पशुओं का भगाते समय किसान अजुद्धी की कुएं में गिरने से जान चली गई। ये मामले तो बानगी भर हैं। सड़कों पर भी आए दिन घुमंतू पशुओं के कारण राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं।
बाड़ लगाने पर भी नहीं बच रही फसल
फतेहाबाद। पशुओं से फसल बचाने के लिए किसान कंटीले तारों की बाड़ लगा रहे हैं। गढ़ी साबराय निवासी किसान चुन्नीलाल ने बताया कि रखवाली के बाद भी फसल नहीं बचा पा रहे हैं। मजबूरी में हजारों रुपये खर्चकर फेंसिंग करानी पड़ रही है। कृपालपुरा के किसान भगवान सिंह, साहब सिंह आदि ने बताया कि खेत में बाड़ लगवाने में 30,000 रुपये खर्च हो गए। रात में निगाह चूकने पर घुमंतू पशु फसल नष्ट कर देते हैं। बीडीओ मंगल यादव ने बताया है कि 29 ग्राम पंचायतों में गोशाला निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ है और इसके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। संवाद
निगाह चूकते ही चट कर जाते हैं फसल
किरावली। बैमन गांव के किसान ओम प्रकाश और ओमकार सिंह ने बताया कि पशुओं से फसल बचाने के लिए किसान रात-दिन एक कर रहे हैं। फिर भी निगाह हटते ही पशु उनकी फसल को बर्बाद कर देते हैं। गांव मसेल्या जैंगारा के रमेश चंद, भिलावटी के जुगनू का कहना है कि पशुओं को पकड़कर पशुशाला भेजा जाना चाहिए। गांव कुकथला के होतम सिंह का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी समस्या के निदान के लिए पूरे प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। संवाद