गांव मौजेपुर निवासी बीएसएफ जवान सुभाष चंद्र बांग्लादेश सीमा पर 26 दिसंबर 2003 को तस्करों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। 18 साल बाद उनकी पत्नी कैजुअल्टी प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ।
बांग्लादेश सीमा पर 26 दिसंबर 2003 को तस्करों से मुठभेड़ के दौरान मैनपुरी जनपद के गांव मौजेपुर निवासी बीएसएफ जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। 18 साल बाद बुधवार को सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट ने गांव पहुंचकर शहीद की पत्नी को कैजुअल्टी प्रमाणपत्र सौंपा। इस दौरान जवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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भोगांव थाना क्षेत्र के गांव मौजेपुर निवासी सुभाष चंद्र एक मार्च 1989 को बीएसएफ में भर्ती हुए थे। वह आरक्षी के पद पर थे। वर्ष 2003 में उनकी तैनाती मेघालय की दक्षिण गोरो हिल्स पर थी। 26 दिसंबर को बांग्लादेश बॉर्डर पर ड्यूटी के दौरान तस्करों से मुठभेड़ हो गई थी। मुठभेड़ में सुभाष चंद्र वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट शहीद के घर पहुंचे
18 साल बाद 178 सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट सुनील कुमार आरक्षी सुभाष चंद्र के घर पहुंचे। उनकी पत्नी को कैजुअल्टी प्रमाणपत्र दिया। डिप्टी कमांडेंट ने बताया कि आरक्षी ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। बीएसएफ शहीदों को सम्मान देने के लिए ऑपरेशन कैजुअल्टी सर्टिफिकेट दे रहा है।
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प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद डिप्टी कमांडेंट, बीएसएफ के इंस्पेक्टर एचएस उपाध्याय, आरक्षी एम सेनापति, आरक्षी शिव प्रताप, मुज्जफ़ा एस, भोगांव थाना प्रभारी रविंद्र बहादुर सिंह आदि ने शहीद के चित्र पर पुष्प चढ़ाए और माल्यार्पण किया।