आगरा के थाना फतेहाबाद में प्रसूता की मौत के मामले में आयुष विभाग के डॉक्टर, आशा समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। नारायणी अस्पताल चलाने वाला अस्पताल सरकारी आयुर्वेद चिकित्सक बताया गया है। प्रसूता की मौत के बाद स्टाफ मरीजों को बाहर निकाल अस्पताल पर ताला लगाकर भाग गया था। इसे सील करते हुए आशा की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
फतेहाबाद के रसूलपुर निवासी पवन कुमार ने बताया कि पत्नी लक्ष्मी देवी (22) को प्रसव पीड़ा होने पर 18 जनवरी को आशा निर्मला के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। कुछ देर बाद आशा बोली कि यहां पर प्रसव कराना ठीक नहीं है, यहीं यमुना रोड स्थित नारायणी देवी अस्पताल है, जहां मेरी जान पहचान है, सस्ते में प्रसव हो जाएगा।
यह कहते हुए आशा ने अस्पताल में भर्ती कराया और सामान्य प्रसव हुआ। लक्ष्मी देवी ने बच्ची को जन्म दिया। आधा घंटे बाद बताया कि प्रसूता की हालत खराब हो गई है, इसे आगरा लेकर जाना पड़ेगा। खुद को डॉक्टर बताने वाला हिम्मत सिंह प्रसूता को लेकर फतेहाबाद रोड स्थित अस्पताल पहुंचा।
बहाना बनाकर फरार हुआ डॉक्टर
वहां भर्ती नहीं किया तो नामनेर स्थित दूसरे अस्पताल में उसे भर्ती कराने के बाद हिम्मत सिंह बहाना बनाकर भाग गया। यहां के स्टाफ ने लक्ष्मी को मृत बताया। परिजन शव लेकर नारायणी अस्पताल पहुंचे तो यहां ताला लगा था।
परिजनों ने हंगामा करने पर पुलिस पहुंची। उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराया। पति की तहरीर पर अस्पताल संचालक डॉ. शंभू दयाल, हिम्मत सिंह और आशा निर्मला के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कराया।
अस्पताल संचालक डॉ. शंभू दयाल फतेहाबाद के पैंतीखेड़ा स्थित नव स्वास्थ्य केंद्र में आयुष चिकित्सक के पद पर कार्यरत बताया है। सोमवार को एसडीएम एम. अरुन्मौलि और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और अस्पताल को सील कर दिया।
अपंजीकृत अस्पताल सेल प्रभारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने बताया कि अस्पताल सील कर दिया है। अस्पताल के लाइसेंस और चिकित्सकों के बारे में जानकारी की जा रही है। अस्पताल संचालक की रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है।
बोर्ड उखाड़ ले गए, मरीजों को भी भगा दिया
मृतका के भाई गोविंद सिंह ने बताया जब बहन की हालत खराब बताकर आगरा को भेजा, तब अस्पताल में आठ-दस मरीज भर्ती थे। लेकिन बहन की मौत होने के बाद लौटकर आए तो मरीज नहीं थे और अस्पताल को बोर्ड भी हटा दिया था।
आसपास के लोगों से पता चला कि बहन के जाने के बाद सभी को बाहर कर ताला लगाकर स्टाफ भाग गया। इस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल भी सील लगाई थी। सील खुलने के बाद फिर से अस्पताल शुरू कर दिया।
कमीशन के खेल पर मरीजों की खरीद-फरोख्त
कमीशन के खेल में मरीजों की खरीद-फरोख्त हो रही है। इसमें आशा बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इनको प्रति मरीज लाने पर अस्पताल संचालक तय कमीशन देते हैं। इससे पहले भी बरहन में भी आशा गर्भवती महिला को सीएचसी से लेकर झोलाछाप के अस्पताल लेकर गई थी। यहां प्रसव कराने के बाद प्रसूता की मौत हो गई थी। आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
जांच के लिए कमेटी बनाई
सीएमओ डॉ मुकेश वत्स ने बताया कि आशा की सेवा समाप्त कर दी है, नारायणी अस्पताल चलाने वाला सरकारी डाक्टर है, इसकी जांच के लिए कमेटी बनाई है, प्रसव झोलाछाप ने कराया है, या वह चिकित्सक है, इसकी शैक्षणिक प्रमाण पत्र मांगे गए हैं।