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बेशकीमती जमीन पर कब्जा: टहल सिंह से मिला बड़ा सुबूत, 2000 पन्नों की चार्जशीट; एसओ साजिश में शामिल

Mon, 13 May 2024 04:14 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

बोदला जमीन प्रकरण में टहल सिंह से बड़ा सबूत हाथ लगा है। बेशकीमती जमीन पर कब्जा कराने की साजिश में तत्कालीन एसओ का भी हाथ रहा। उसके आधार पर 2000 पन्नों की चार्जशीट बनी है।
 
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जगदीशपुरा थाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के बोदला जमीन प्रकरण में पुलिस को सबसे बड़ा सुबूत टहल सिंह के बयान से मिला। उमा देवी और केयरटेकर रवि कुशवाह ने टहल सिंह को मृत दर्शा दिया था। श्मशान घाट की रसीद से लेकर मृत्यु और वारिसान प्रमाणपत्र तक फर्जी बनवाए गए थे। टहल सिंह जिंदा निकले। पुलिस के समक्ष बयान दिए, कोर्ट भी गए। पुलिस के पास एसओ के साजिश में शामिल होने, अन्य आरोपियों की संलिप्तता के पुख्ता सुबूत हैं। उसके आधार पर 2000 पन्नों की चार्जशीट बनी है।
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डीसीपी सिटी सूरज राय की निगरानी में एसआईटी गठित की गई थी। इसमें अपर पुलिस उपायुक्त अपराध डॉ. राजीव कुमार सिंह, एसीपी लोहामंडी मंयक तिवारी, एसओ लोहामंडी कुशलपाल सिंह, एसएचओ जगदीशपुरा आनंदवीर सिंह शामिल थे। जमीन प्रकरण में बड़े नाम सामने आए। जनप्रतिनिधि भी आमने-सामने आ गए। लखनऊ तक मामले की गूंज रही। पुलिस ने हर बिंदुओं पर जांच की। पुलिस ने पाया कि जमीन के मालिक टहल सिंह जिंदा हैं। उन्होंने बयान में कहा था कि उमा देवी को नहीं जानते हैं। वह जिस जसवीर को उनका बेटा दर्शा कर उनकी पुत्रवधू होने का दावा कर रही है, वह जसवीर उनका बेटा नहीं, बल्कि साला था। वह उमा देवी से कभी नहीं मिले हैं।

 

इसके अलावा पुलिस ने पाया कि एसओ साजिश में शामिल था। जमीन पर पहले नेमीचंद जैन और टहल सिंह व्यापार करते थे। इस आधार पर नेमीचंद जैन ने कब्जा ले लिया। उनके पास नगर निगम से संबंधित कागजात थे। रातोंरात सीसीटीवी कैमरे लगवाए और दीवार बनाई। चौकीदार तैनात किया। केयरटेकर रवि कुशवाह के घर के सामान को लूटकर ले जाने में किशोर बघेल का नाम सामने आया। बाद में पुलिस ने उसकी निशानदेही पर एक जमीन से लूटा गया सामान बरामद किया। उस पर डकैती के साथ माल बरामदगी की धारा भी लगाई गई। पुलिस को डिजिटल साक्ष्य भी मिले।

 

छह आरोपियों ने लिया स्टे, तीन के नाम बढ़ाए गए
पुलिस ने जितेंद्र सिंह, पुरुषोत्तम पहलवान, अमित अग्रवाल को जेल भेजा था। कमल चौधरी, आर्यन, भूपेंद्र पहलवान, किशोर बघेल, नेम कुमार जैन और आनंद जुरेल को कोर्ट से राहत मिल गई थी। मुकदमे में बिल्लू चौहान, कमला नगर के एमके अग्रवाल और ट्रांस यमुना इलाके के जितेंद्र मास्टर के नाम बढ़ाए गए थे। उमा देवी के पति पदम सिंह से जेल भेजे गए राजू की दोस्ती थी। इस कारण उसका उमा देवी के घर आना-जाना था। राजू, जितेंद्र मास्टर को जानता था। जितेंद्र की पहचान धर्मेंद्र वर्मा से थी। राजू ने ही उमा देवी को जमीन कब्जाने की साजिश में शामिल किया। वह लालच में फंस गईं। पुलिस ने मृत्यु और वारिसान के फर्जी दस्तावेज तैयार करने में उमा देवी सहित 6 को जेल भेजा। बाद में पुलिस ने मोहित, राजू और धर्मेंद्र काे रिमांड पर लिया था। उनसे पूछताछ के बाद ही तीन नाम प्रकाश में आए। वहीं उमा देवी सहित अन्य के साथ जमीन को कब्जाने की साजिश में धर्मेंद्र की अहम भूमिका रही।

 
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नहीं खुला गांजा और शराब बरामदगी का राज
थाना पुलिस ने जमीन प्रकरण में 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट की है। मगर, कई सवाल हैं जो अब भी राज हैं। 2 फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए थे। एक में 9 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। दूसरे में शराब बरामद की गई। रवि कुशवाह और उसके भाई सहित 3 से गांजा बरामद दिखाया। दो महीने बाद उसके घर से ही शराब बरामद की। उसकी पत्नी और बहन को जेल भेजा गया। पुलिस का फर्जीवाड़ा सुर्खियों में आने के बाद जांच हुई। एसओ के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई। एसओ सहित 4 को निलंबित किया गया। एसआईटी की जांच हुई। मगर, अब तक यह राज सामने नहीं आया कि गांजा और शराब कौन-कहां से लेकर आया। आबकारी निरीक्षक पर गाज गिरने के बाद भी टीम में शामिल पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसएचओ जगदीशपुरा आनंदवीर सिंह ने बताया कि मामले में विवेचना प्रचलित है।
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