आगरा में अस्थमा के मरीजों की संख्या में भले ही 200 फीसदी का उछाल आया हो। सांस रोगी इन्हेलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन आगरा के लोग बीते पांच साल में सबसे अच्छी हवा में सांस ले रहे हैं। ऐसा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बता रहे हैं। पांच साल में नवंबर और दिसंबर में हवा की गुणवत्ता इतनी अच्छी पहले कभी नहीं रही। दावा है कि आगरा मॉडल अपनाने के बाद एकाएक बीते साल से आगरा के प्रदूषण में पांच गुना तक कमी दर्ज की गई है।
ताज ट्रेपेजियम जोन में 25 से ज्यादा बंदिशों और ताजमहल के 500 मीटर दायरे में डीजल, पेट्रोल के वाहनों का प्रवेश बंद करने जैसे कदमों के बाद भी प्रदूषण में 22 साल में कमी दर्ज नहीं की जा सकी, लेकिन आगरा मॉडल अपना कर महज दो साल में ही प्रदूषण नियंत्रित कर लिया गया। आंकड़े कुछ ऐसा ही बता रहे हैं। बीते पांच सालों में दिसंबर माह के आंकड़ों के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि 4 दिसंबर को आगरा का एक्यूआई महज 67 दर्ज किया गया, जबकि पांच साल पहले यह 361 पर था। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा के मुताबिक हवा तेज चलने और धूप खिलने के कारण यह तब्दीली आई है। मौसम के कई कारक इस बार नहीं है, जिससे प्रदूषण स्तर कम हुआ है।
क्या कहते हैं पर्यावरणविद
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि ऐसा कैसे संभव है कि ताजमहल जैसी शांत, हरियाली से घिरी जगह के अंदर, जहां वाहनों का संचालन आसपास भी नहीं होता, वहां एक्यूआई 300 के पार हो और संजय प्लेस, रोहता जैसी जगह 60। सिर्फ कागजों पर ही साफ हवा दिखाई जा रही है। टीटीजेड अथॉरिटी को सुप्रीम कोर्ट में इसका जवाब देना पड़ेगा।
पांच साल में दिसंबर में ऐसा रहा हाल
साल 1 दिसंबर 2 दिसंबर 3 दिसंबर 4 दिसंबर
2020 317 347 331 361
2021 294 323 107 185
2022 220 209 242 266
2023 71 126 179 93
2024 162 61 98 67
ऑटोमेटिक स्टेशनों में ऐसा रहा एक्यूआई
स्थल एक्यूआई
मनोहरपुर 52
रोहता 64
संजय प्लेस 67
आवास विकास 84
शाहजहां पार्क 86
शास्त्रीपुरम 83