सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से 48 घंटे पहले नगर निगम ने राजा मंडी बाजार स्थित लाभचंद्र मार्केट के पट्टाधारक प्रदीप जैन को नोटिस जारी कर 15 दिन में अवैध कब्जा हटाने का अल्टीमेटम दिया था। मगर पट्टाधारक ने कब्जा नहीं हटाया। समय सीमा खत्म होने के बाद अब नगर निगम का बुलडोजर गरजने की संभावना बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 फरवरी को 12 सदस्यीय टीम ने लाभचंद्र मार्केट की पैमाइश कराई थी। एडीएम प्रोटोकॉल ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें पुष्टि हुई कि लाभचंद्र मार्केट में बनीं 69 दुकानें और ऊपर खड़े होटल धर्मलोक और चंद्रलोक सड़क की जमीन पर खड़े हैं। इसके बाद 13 अप्रैल को पूर्व डीएम अरविंद बंगारी ने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल को रिपोर्ट भेजते हुए अवैध निर्माण ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद 2 मई को नगर निगम की संपत्ति प्रभारी श्रद्धा पांडेय ने पट्टाधारक प्रदीप जैन को 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम दिया था। 4 मई को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने स्वीकार किया था कि वह प्रकरण से भली भांति परिचित हैं। व्यापारियों के लिए पुनर्वास योजना बनाने को उन्होंने समय मांगा। कोर्ट ने 22 मई तक का समय दिया है।
नगर निगम ने नोटिस में पट्टाधारक को स्पष्ट कहा गया था कि यदि 15 दिन में स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो निगम बलपूर्वक निर्माण ध्वस्त कर देगा, जिसका संपूर्ण खर्च भी कब्जाधारकों को ही वहन करना होगा। इस पूरे विवाद की जड़ सड़क की जमीन पर किया गया अवैध निर्माण है। यह मामला तब गरमाया जब सुप्रीम कोर्ट में अमरजोत सिंह सूरी बनाम प्रदीप कुमार जैन केस के तहत सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर सड़क की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
प्रशासन ने इस मामले में सन 1874-75, 1923-24 और 1929-30 के ब्रिटिशकालीन राजस्व अभिलेखों और नजूल सर्वे शीट संख्या-66 की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि लाभचंद्र मार्केट का आंशिक हिस्सा गाटा संख्या 284 और 287 पर बना है, जो सरकारी अभिलेखों में रास्ता और सड़क पुख्ता के रूप में दर्ज है। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, धर्मचंद जैन के पक्ष में 1947 में की गई लीज को शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर निगम ने 5 अप्रैल 2025 को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी जमीन खाली नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामले में सुनवाई से 48 घंटे पहले निगम ने नोटिस की कार्रवाई की।
नगर निगम को करनी है कार्रवाई
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि नगर निगम ने लीज निरस्त की है। उन्होंने ही पट्टा किया था। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी नगर निगम करेगा। हमेशा जो सहयोग मांगा जाएगा, वो किया जाएगा।