शहर में भी बिल्डरों की मनमानी की कम शिकायतें नहीं हैं। मोटी रकम वसूलने के बाद भी ग्राहकों को उनके आशियाने पर कब्जा नहीं दिया है। ऐसे तमाम ग्राहक बिल्डरों के चक्कर लगाकर परेशान हैं। उनके टालमटोल रवैये से सालों गुजर गए, कई बिल्डरों ने तो बुकिंग धनराशि जमा कराने के बाद अपने प्रोजेक्ट ही बंद कर दिए।
ऐसे में एक मई से लागू होने वाले रियल एस्टेट रेगूलेटर कानून का लोगों ने स्वागत किया है। उन्हें बिल्डरों की मनमानी से मुक्ति मिलती दिख रही है। हालांकि बिल्डिरों ने भी इस कानून का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस नये कानून से बिल्डर और निवेशकों के बीच विश्वास का एक नया रिश्ता कायम होगा। साथ ही अवैध तरीके से भवनों का निर्माण कर रियल एस्टेट सेक्टर को बदनाम करने वालों से मुक्ति मिलेगी। वहीं, ग्राहकों का मानना है कि अधिकांश बिल्डर प्रोजेक्ट की लॉचिंग के वक्त तमाम आफर देकर फंसा लेते हैं। मगर, एक बार धनराशि आ जाने के बाद ग्राहकों की तरफ मुड़कर नहीं देखते।
सरकार को भी सहयोग करना होगा
बिल्डरों का मानना है कि बिल्डरों पर सख्ती ठीक है लेकिन सरकार को भी इसमें सहयोग करना होगा। क्योंकि बिल्डर अपने प्रोजेक्ट में सुविधाएं देने का वादा करते हैं, उनमें से कुछ सरकारी विभागों को पूरी करनी होती हैं। इसके लिए बिल्डर विकास प्राधिकरण में डेवलेपमेंट चार्ज भी जमा कराते हैं। बिल्डरों की शिकायत है कि इसके बावजूद सरकारी विभाग कालोनी या मल्टीस्टोरी के बाहर विकास कार्य नहीं कराते। ग्राहक इसका दोष बिल्डर को ही देते हैं।
रियल एस्टेट के इस नए कानून की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अगर, ये लागू हो जाता है तो इससे खरीदारों को तो लाभ होगा, बिल्डर और निवेशकों के बीच भी विश्वास कायम होगा।
केसी जैन, अध्यक्ष, सिटी रेडको
नये कानून से अवैध तरीके से निर्माण करने वाले बिल्डरों को नुकसान होगा। प्रतिष्ठित बिल्डर तो पहले से ही अपने ब्रांड की साख के खातिर नियम और शर्तों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। अवैध बिल्डिंगों के निर्माण में कमी आएगी।
भगत सिंह बघेल, अध्यक्ष, क्रेडाई, आगरा चैप्टर
बहुत से बिल्डर बुकिंग के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, मोटी रकम जमा करा लेते हैं, इसके बावजूद समय पर कब्जा नहीं देते हैं। आम आदमी इनके चक्कर लगाता रहता है। खरीदार को सालों उलझाए रखते हैं। नये कानून से आम खरीददारों को काफी राहत मिलेगी।
अमित जैन, बायर