ताजमहल के शहर में सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ‘मीठी-मीठी’ घोषणाएं बेशक करते रहे, लेकिन जब बजट की बारी आई तो पर्यटन उद्योग की झोली खाली छोड़ दी। कभी हॉट एयर, बर्ड फेस्टिवल, एनआरआई सम्मेलन तो कभी कार रैली। पर्यटन का नाम ले लेकर यूपी की बदलती तस्वीर दिखाने वाले मुख्यमंत्री ने पर्यटन उद्योग को बजट में निराश किया।
आगरा में ताजमहल के साए तले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस पर्यटन उद्योग के विकास के दावे किए, उसके लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया। इंटरनेशनल एयरपोर्ट हो या होटलों का लग्जरी टैक्स लिमिट बढ़ाना या फिर रेस्टोरेंट पर वैट में कमी। पर्यटन उद्योग की किसी मांग को प्रदेश सरकार ने बजट में जगह नहीं दी। 60 लाख भारतीय और 7 लाख विदेशी पर्यटकों को लुभाने वाले आगरा के पर्यटन उद्योग में बजट से बेहद निराशा है।
फेस्टिवल पर खर्च, सुविधाओं पर नहीं
प्रदेश सरकार ने अब तक आगरा में जितने भी फेस्टिवल और कार्यक्रम किए, उनमें से अधिकांश व्यक्तिगत मुनाफे के साबित हुए। चाहे वह हॉट एयर बैलून हो या बर्ड फेस्टिवल। हॉट एयर बैलून में प्रदेश सरकार के डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने पर भी स्काई वाल्ट्ज ने पर्यटकों को बैलून की सैर नहीं कराई, बल्कि बुकिंग कर कमाई भी की। पर्यटन उद्यमियों का मानना है कि साल भर जिन फेस्टिवल और आयोजनों पर जितना खर्च किया गया, उससे कहीं कम बजट होटलों को लग्जरी टैक्स रियायत और पर्यटन सुविधाओं पर खर्च होता।
‘पर्यटन नीति के एलान के बाद उम्मीद थी कि लग्जरी टैक्स की लिमिट बढ़ाई जा सकती है, लेकिन बजट में होटल, एंपोरियम, हैंडीक्राफ्ट सहित सभी बेहद निराश हुए हैं।’
रमेश वाधवा,
अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट आनर्स एसो.
‘20 साल पहले जो मांगें थीं, वही आज हैं। युवा मुख्यमंत्री ने आगरा में कई आयोजन कर उम्मीद बंधाई थी। लेकिन चुनावी साल का यह बजट भी निराश कर गया।’
संदीप अरोड़ा
अध्यक्ष, आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन
‘मेट्रो पूरे शहर की अर्थव्यवस्था के साथ विकास की नई तस्वीर दिखाती है, लेकिन आगरा इससे महरूम रहा है। यह चुनावी नफे नुकसान का बजट है।’
डा. शरद भारद्वाज, अर्थशास्त्री
आगरा क्या, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बजट में उपेक्षा की गई है। मेट्रो के लिए दूसरे शहरों को बजट दिया, लेकिन आगरा नहीं। नाम किसानों, युवाओं का, लेकिन उन्हें भी बजट में क्या मिला। चुनावी बजट से सपा को कुछ हासिल नहीं होने वाला
डा. धर्मपाल सिंह
विधायक, एत्मादपुर