वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में बजट 2026 पेश किया। इस पर सीए अर्थशास्त्रियों से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखेगा।
अर्थशास्त्रियों और सीए की नजर में बजट लोकल टू ग्लोबल वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें विकास, तकनीक, रोजगार और उद्यम पर अधिक फोकस किया गया है। सामान्य वर्ग के लिए कोई खास योजना नहीं है लेकिन कैंसर-मधुमेह समेत सात गंभीर रोगों की दवाएं सस्ती करने से बड़ी राहत मिलेगी। आयकर चोरी में छूट और 10 साल पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के नियम से छूट की घोषणा से भी बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखेगा। बजट पर सीए और अर्थशास्त्रियों ने अपनी राय रखी।
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रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
आरबीएस कॉलेज की अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष अंजू जैन ने बताया कि बजट में विकास, तकनीकी और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया गया है। इसमें चिकित्सा, रेल और उद्योगों के लिए कई बेहतर योजनाएं हैं। तकनीक-स्टार्टअप से नए उद्यम और रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। आने वाले समय में बजट प्रभावी दिखेगा। महत्वाकांक्षी योजनाओं से वित्तीय दबाव पड़ेगा।
मध्यम वर्ग को निराशा, कौशल विकास को बढ़ावा
आगरा कॉलेज अर्थशास्त्र विभाग अध्यक्ष प्रो. दीपा रावत का कहना है कि बजट में मध्यम वर्ग के लिए कुछ खास नहीं है। कौशल विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोफार्मा, एमएसएमई पर फोकस रखा गया है। टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें सुविधाएं बढ़ने से लोगों को राहत मिलेगी। खासतौर से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
आर्थिक विकास देने वाला बजट
आरबीएस कॉलेज अर्थशास्त्र विभाग सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. रविकांत का कहना है कि रेल कॉरिडोर, एम्स, शी-मार्ट समेत कई ऐसी योजनाएं हैं जो आर्थिक गति देने वाली हैं। इसमें युवाओं के स्टार्टअप और एमएसमएई पर भी खासा जोर दिया है। इससे स्वरोजगार के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को भी समर्थ बनने के अवसर मिलेंगे।
आयकर नियमों में बदलाव से राहत
सीए विवेक अग्रवाल ने कहा कि व्यापार, उद्यम और आयकर से जुड़े मामलों में बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। अब 10 साल पुराने मामलों के रिकॉर्ड सहेजने की जरूरत नहीं है। पहले गंभीर आयकर चोरी मामलों में विभाग 10 साल पुराने केस भी खोल सकता था, इससे छूट मिली है।
ग्रामीण महिलाओं के उत्पादाें को मिलेगा बाजार
सीए चर्चित अग्रवाल का कहना है कि एमएसएमई को लोकल टू ग्लोबल चैंपियंस बनाने वाला बजट है। इसमें महिला, उद्यम, युवाओं और एमएसएमई पर अधिक जोर दिया है। ग्रामीण महिलाओं के लिए शी-मार्ट खुलने से उनके उत्पाद को बाजार मिलेगा। रिटर्न रिवीजन की तारीख 31 मार्च होने से भी राहत मिली है।