आयात शुल्क हटाया जाए
कच्चे माल पर बीते साल जो 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया गया, उसे हटाया जाए। आयकर दाता को सामाजिक सुरक्षा जरूर मिलनी चाहिए। सरकार जो भी टैक्स वसूले, उसका एक हिस्सा करदाता की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा पर लगाए, तभी लोग प्रेरित होंगे। - पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
फुटवियर निर्यात पर पड़ा असर
कोरोना के कारण यूरोपीय बाजारों में फुटवियर निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। सरकार को इंसेंटिव योजना को आकर्षक बनाना चाहिए। लोन पर ब्याज दरों में कमी के साथ इस बजट में घरेलू बाजार और निर्यात के लिए रियायतें देनी होंगी, तभी पटरी पर लौट पाएंगे। नजीर अहमद, जूता निर्यातक
नई तकनीक की जरूरत
फुटवियर उद्योग इस समय बहुत बुरे हालात से जूझ रहा है। नई तकनीक की जरूरत है। मशीनों पर सब्सिडी और उत्पादन आधारित इंसेंटिव दिए जाएं। कोरोना संक्रमण से जोखिम बढ़ा है। इस जोखिम को कम करने में सरकार मदद करे। इस बजट से बहुत उम्मीद लगा रखी हैं। - प्रदीप वासन, जूता निर्यातक
पर्यावरण नियमों में ढील दी जाए
पर्यावरण नियमों में कुछ ढील दी जाए। निर्यात के मुकाबले पांच फीसदी आयात करने के पुराने नियम को फिर से लागू किया जाए और कच्चे माल पर आयात शुल्क को पूरी तरह से हटाया जाए। इससे लागत बढ़ रही है। पहले ही कच्चा माल महंगा हो चुका है। - जितेंद्र त्रिलोकानी, जूता निर्यातक
सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया
कोरोना संक्र मण को पूरे दो साल हो गए। सबसे बुरा असर पर्यटन पर पड़ा। ताजमहल बंद रहा तो सैलानी आने बंद हो गए। हमने जैसे तैसे इस बुरे समय को काटा, लेकिन सरकार से सहयोग तो नहीं मिला। यूपी सरकार और केंद्र के बजट में पर्यटन को छोड़कर बाकी सब होगा। - रमेश वाधवा, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसो.
बिजली के बिल नहीं भर पा रहे
यूपी सरकार ने पहले ही उपेक्षित कर दिया है। केंद्र सरकार के बजट में कोई ऐसी योजना नहीं, जिससे कोरोना संक्रमण से जूझते पर्यटन उद्योग को कोई रियायत मिले, जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित पर्यटन ही है। बिजली के बिल भी नहीं भर पा रहे। - अवनीश शिरोमणि, महासचिव, एचआरओए
बजट से कोई उम्मीद नहीं
केंद्र सरकार के सात आम बजट और यूपी सरकार के पांच बजट में मैने तो आगरा के पर्यटन के लिए कोई योजना देखी नहीं। न ही अब कोई उम्मीद है। हमारे इस बुरे दौर में भी जब सरकार से मदद नहीं मिल रही तो कैसे कोई उम्मीद लगाए। - राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड
किसी भी चीज में कोई रियायत नहीं
कोई इंसेटिव नहीं, कोई रियायत नहीं। बिजली में न हाउस टैक्स में। कमाई जीरो और खर्चे पूरे होंगे तो कोई भी उद्योग हो, चल नहीं पाएगा। सरकार से उम्म्मीदें लगाई थी, पर दो साल में धराशाई हो गईं। बजट में भी कुछ आ जाए तो अच्छा है, वरना खाली हाथ तो हैं ही। - गौरव चौहान, होटल संचालक