छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिहाज से सरकार का बजट रास नहीं आया है। न प्रोफेशनल कोर्स और मेडिकल कॉलेजों के संबंध में घोषणा है न प्राइवेट कॉलेजों में फीस कम करने के साथ सीटें बढ़ाने की। शिक्षा ऋण सस्ते करने के संबंध में भी बजट से निराशा ही हाथ लगी।
आगरा में सरकारी कॉलेजों में इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत अन्य कोर्स के लिए सीटों की कमी है। एसएन मेडिकल कॉलेज में तो एमबीबीएस की 128 ही सीटें हैं। इस कारण छात्रों को निजी कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ता है, जिनमें अधिक फीस देनी होती है। एमबीबीएस करना चाह रहे युवा उम्मीद लगाए बैठे थे कि सीटों की वृद्धि जरूर की जाएगी।
'नए कॉलेज खोलने चाहिए थे'
बीएससी प्रथम की छात्रा अंजलि कुमारी ने कहा कि बजट ने निराश किया। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ाने और नए कॉलेजों के बारे में उम्मीद थी जो पूरी नहीं हुई। स्नातक के छात्र सुमित तिवारी ने कहा कि बजट में हमारे लिए कुछ नहीं था। जीडीपी का 20 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। कॉलेज तो बढ़ाने ही चाहिए।