आगरा में 10 साल से की जा रही आलू प्रोसेसिंग यूनिट और आलू अनुसंधान केंद्र की मांग इस बजट में भी पूरी नहीं हुई। आगरा में गेहूं के बाद आलू सबसे ज्यादा होने वाली फसल है। यहां 75 हजार हेक्टेयर तक जमीन पर हर साल आलू की बुवाई होती है। 280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होती है। सम्मान निधि नहीं बढ़ने से भी छोटे काश्तकारों की उम्मीदों को झटका लगा है।
एक भी सौगात नहीं मिली
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानियां ने कहा कि आलू अनुसंधान केंद्र, प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाने का हर चुनाव में आश्वासन मिलता है। इस बार भी इनमें से एक भी सौगात नहीं मिली है। आलू किसान प्रदीप शर्मा ने कहा कि आलू अनुसंधान केंद्र से उन्नत किस्म के आलू बीज पैदा होते। आलू का निर्यात किया जा सकता था। जिले के किसानों के लिए बजट निराशाजनक रहा।
डीजल में सब्सिडी भी नहीं दी
किसान नेता चौधरी रामवीर सिंह ने कहा कि यूनिट खुलने से आलू किसानों की तकदीर बदल जाती। डीजल में भी सब्सिडी नहीं दी। किसान परिवारों के लिए कुछ नहीं दिया गया। भारतीय किसान संघ के प्रांत अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने कहा कि सम्मान निधि को बढ़ाकर 18 हजार रुपये किए जाना चाहिए था। वित्त मंत्री को पत्र भी लिखा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। निराशा के भाव हैं।