आगरा। नगर निगम में महापौर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त के बीच छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। बुधवार को इस विवाद में बसपा पार्षद दल ने महापौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सदन के नाम पर गुमराह कर भाजपा की निजी बैठक में बुलाया गया था। जैसे ही उन्हें असलियत का पता चला, वे बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल आए।
साकेत कॉलोनी में बुधवार दोपहर प्रेसवार्ता के दौरान बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह और उप नेता रेखा भास्कर ने मेयर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव का बिना सदन के कोई कानूनी या नैतिक महत्व नहीं है। पार्षदों ने इसे आगरा की जनता के साथ विश्वासघात और नगर निगम के इतिहास में लोकतंत्र की हत्या करार दिया। पार्षद कप्तान सिंह ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष ने निगम की विफलताओं पर सवाल उठाए, तो महापौर ने उन्हें दुस्साहस करने वाला बताकर माफी मांगने का दबाव बनाया।
बसपा पार्षदों का कहना है कि महापौर सदन चलाने के बजाय विपक्ष के लिए मिर्ची लगी जैसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग कर चुकी हैं, जो पार्षदों का सीधा अपमान है। विपक्ष ने वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर निगम प्रशासन को घेरते हुए कहा कि 15वें वित्त आयोग के 140 करोड़ रुपये का बजट 31 मार्च तक वापस होने की कगार पर है। बोर्ड की बैठकें और कार्यकारिणी की प्रक्रियाएं पूरी न होने से विकास कार्य ठप हैं। पिछले तीन वर्षों से महापौर और नगर आयुक्त के बीच जारी शीत युद्ध का खामियाजा जनता और पार्षद भुगत रहे हैं।
महापौर हर महीने नगर आयुक्त पर भ्रष्टाचार के नए आरोप लगाती हैं, लेकिन आज तक कोई जांच पूरी नहीं हुई। समझ नहीं आता कि कुछ दिनों बाद ऐसी कौन सी सुविधा उन तक पहुंच जाती है कि उनकी आवाज बंद हो जाती है। — कप्तान सिंह, नेता बसपा पार्षद दल
भीमनगरी और आंबेडकर जयंती पर आंदोलन की चेतावनी
बसपा पार्षदों ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की कि 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और भीम नगरी के विकास कार्य तत्काल पूरे किए जाएं। यदि एक हफ्ते में सुधार नहीं हुआ, तो बसपा पार्षद दल बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। इस अवसर पर पार्षद अरविंद मथुरिया, उप नेता पार्षद दल रेखा भास्कर, गंगाराम, मो. सुहेल कुरैशी और बंटी माहौर आदि ने विचार रखे।