आगरा की आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर नौ में गुरुवार रात को एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने रात को फेसबुक पर एक पोस्ट भी किया। पुलिस आत्महत्या के पीछे प्रेम संबंध मानकर चल रही है।
शाहगंज निवासी 20 वर्षीय आयुष उर्फ बजरंगी सिकंदार की आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर नौ में आनलाइन शॉपिंग कराने वाली कंपनी में काम करता था। परिजनों ने बताया कि आयुष कंपनी के ऑफिस में ही रहता था।
10 दिन में एक बार घर आता था। वो बीएससी कर रहा था। कंपनी में एकाउंट का काम देखता था। उसके साथ ही कंपनी संचालक पंकज त्यागी भी रहता था। पुलिस ने बताया कि गुरुवार रात को आयुष घर गया था। अपनी स्कूटी को रख आया।
ऑफिस में लटकी मिली लाश
आयुष- फाइल फोटो
परिजनों से कहा कि दोस्त के साथ जाएगा। इसके बाद ऑफिस आ गया। रात 11 बजे खाना खाया। रात एक बजे तक पंकज और आयुष बात करते रहे। इसके बाद पंकज कमरे में सोने चला गया।
शुक्रवार सुबह नौ बजे साफ-सफाई के लिए एक महिला आई। कंपनी के ऑफिस का एक कमरा अंदर से बंद होने पर महिला को शक हो गया। उसने पंकज को जानकारी दी।
पंकज ने कमरे की खिड़की से देखा तो आयुष रस्सी से पंखे के कुंडे पर बने फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। जानकारी मिलने पर परिजन भी आ गए। उन्होंने हंगामा कर दिया और हत्या की आशंका जाहिर की।
फेसबुक पर जाहिर किए इरादे
आयुष की आखिरी फेसबुक पोस्ट
इंस्पेक्टर थाना सिकंदरा ने बताया कि कमरे से एक रजिस्टर में रखा सुसाइड नोट बरामद किया गया है। इसमें टाइप करके लिखा गया है कि मैंने यह निर्णय खुद लिया है। मेरे जाने के बाद कोई कार्रवाई न हो। आयुष ने फेसबुक पर भी आखिरी बार पोस्ट की हैं। इसमें किसी से अकेले रहने की बात कही है। जांच की जा रही है।
आत्महत्या से पहले आयुष ने फेसबुक पर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। रात 11:39 बजे पोस्ट किया कि जाने मेरे जहन क्या क्या चलता है, रस्सी देख के पंखा याद आ जाता है। इसे डांस ऑफ डेथ नाम से बने पेज पर कॉपी भी किया।
सोशल मीडिया के एक एकाउंट पर लिखा कि तुझे जीना है मेरे बिना। इसमें आयुष की एक फोटो भी है। फोटो के साथ आधा चेहरा किसी और का भी नजर आ रहा है। पुलिस का मानना है कि यह किसी युवती का है। आशंका है कि प्रेम संबंध ही आयुष की आत्महत्या की वजह बने।
होनहार छात्र था आयुष
आयुष- पाइल फोटो
आयुष काफी होनहार था। तीन साल पहले उसकी इंटर की मार्क्सशीट पर एक छात्रा का फोटो आ गया था। आयुष ने शिक्षा विभाग के चक्कर काटे, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। इलाहाबाद भी कई बार गया।
हाल में इलाहाबाद गया तो उससे कह दिया गया कि वो दोबारा इंटर कर ले, तभी मार्क्सशीट सही हो पाएगी। इस पर आयुष काफी निराश हो गया। इस पर उसने अपने परिचित अधिवक्ता प्रेमवीर की मदद से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को ईमेल करके अपनी समस्या भेजी।
आयुश चार भाइयों में सबसे छोटा था। आयुश कंप्यूटर का जानकार था। 14 साल की उम्र से ही कमाने लगा था। वह घर से दूर ही रहता था। उसकी मौत की जानकारी से परिवार में कोहराम मच गया।