आगरा में दिवाली पर इंसाफ की जीत हुई है। हमने जो खो दिया, वह अब लाैटकर नहीं आ सकता है। मगर, उसने जो किया, उसकी सजा मिल गई। अब जिस तरह से उसने मेरी फूल सी बिटिया को तड़पाकर मारा, उस तरह से वो भी मरते समय तड़पना चाहिए। मेरी बेटी कभी वापस नहीं आएगी, पर सजा से ऐसा करने की सोचने वालों की रूह कांप जाएगी। यह बताते हुए मृतक बच्ची की मां और दादी की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। वह अपनी बेटी की याद में आंसू बहा रही हैं। 10 महीने से चाैकीदार राजवीर की सजा के इंतजार में एक-एक दिन गिन रही थीं।