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स्टिंग ऑपरेशन: हैवी लाइसेंस बनवा देंगे, नौ हजार रुपये लगेंगे, माहौल खराब है, शाम को आना

Fri, 07 Feb 2020 11:02 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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संभागीय परिवहन कार्यालय आगरा
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आरटीओ के बाहर दलालों का राज है। दलाल दोपहिया ही नहीं भारी वाहन का लाइसेंस तक सीधे बनवाले का दावा करते हैं। कहते हैं कि पैसे दीजिए मोटर ट्रेनिंग स्कूल के प्रमाणपत्र से लेकर अन्य जरूरी प्रक्रियाएं सभी वह करेंगे।
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लोगों का कहना है कि दफ्तर में सीधे जाओ तो इतने चक्कर लगवाए जाएंगे कि आप थककर लाइसेंस की आस ही छोड़ दो। ऐसे में दलालों के पास जाते हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला के संवाददाता ने आरटीओ के बाहर एक दुकान पर दलाल से हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए बात की। उसने नौ हजार रुपये में
भारी वाहन का लाइसेंस बनवाने का दावा किया।

नौ हजार रुपये तो कम बताए हैं आपको
संवाददाता:
हैवी का लाइसेंस बनवाना है भाई। क्या करना होगा।
दलाल: ट्रेनिंग स्कूल से लैटर लाए हो? 
संवाददाता: ट्रेनिंग स्कूल का लैटर कहां से लाऊं?
दलाल: बहुत सारे ट्रेनिंग स्कूल खुले हुए हैं, किसी से भी ले आओ, तभी फार्म भरा जाएगा।
संवाददाता: अगर ट्रेनिंग स्कूल का लैटर नहीं हो तो बनवा दोगे?
दलाल: कहां से आए हो? 
संवाददाता: यहीं से, जैंगारा से आए हैं। 

दलाल: हो तो जाएगा, करीब नौ हजार का खर्चा आएगा। 
संवाददाता: देख लो, कुछ सात-आठ में काम हो जाए
दलाल: नौ तो कम से कम बताए हैं मैंने आपको। (थोड़ी देर रुककर) एक काम करो, आप फुर्सत में आओ, शाम को आना
संवाददाता: क्यों क्या हुआ?
दलाल: अरे माहौल बहुत खराब है, यहां आए दिन...बैंड बजा पड़ा है। 

यह हैं निर्धारित रेट
1000 रुपये लाइसेंस फीस है भारी वाहन की, 150 रुपये है ट्रेनिंग स्कूल की फीस

प्रशिक्षण प्रमाणपत्र है जरूरी
दोपहिया के लिए लाइसेंस बनवाना फिर भी आसान है मगर भारी वाहन का लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया कठिन है। भारी वाहन का लाइसेंस बनवाने के लिए फार्म भी तब दिया जाता है जब आपके पास मोटर ट्रेनिंग स्कूल का प्रमाणपत्र हो।

मोटर ड्राइविंग स्कूल में 35 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद फार्म पांच भरकर सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके  बाद की प्रक्रिया आवेदक को आरटीओ से करनी होती है। तब हैवी का लाइसेंस बनता है। 

मजबूरी है दलाल से काम करवाना
आरटीओ में सीधे जाने पर फार्म में कमी निकाल दी जाती है। कई चक्कर कटवाते हैं। ऐसे में परेशान होकर दलाल से बात करनी पड़ती है। -मयंक कुमार, अशोक कुमार 

आरटीओ में लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद ट्रेनिंग सेंटर के चक्कर लगाओ। परेशानी उठानी पड़ती है। हैवी का नवीनीकरण भी सरल नहीं रह गया है।
-बंटी 
 
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सवाल: आरटीओ में आपने स्पीकर लगवा दिए कि बाहरी लोगों से काम नहीं करवाएं। इसके बाद भी उनका दखल बंद नहीं हो सका है?
जवाब: हमारी कोशिश है कि लोग सीधे आएं और कोई समस्या हो तो हमें बताएं। दो बार डीएम को भी पत्र लिखा। एडीए की आवंटित दुकानों में अवांछनीय गतिविधियों को रोकने के लिए गुजारिश की।
सवाल: हैवी लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग स्कूलों पर कितने निर्भर हैं आवेदक?
जवाब: ट्रेनिंग स्कूलों की भी मानीटरिंग की जाती है। आवेदक को वहां से टेस्ट पास करने का सर्टिफिकेट देना होता है। कई दफा हम भी दोबारा टेस्ट ले लेते हैं। 
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