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अमर उजाला पड़ताल: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र कार्यालय पर दलालों का कब्जा, छह सौ रुपये लेकर 15 दिन में दे रहे

Thu, 10 Sep 2020 10:14 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

71 साल के छोटे लाल धाकरे निवासी कटरा काछियान, गुदड़ी मंसूर खान की मृत्यु के बाद उनके पुत्र हरिओम धाकरे ने 7 जुलाई को
प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया लेकिन 63 दिन बीत जाने के बाद भी हरिओम धाकरे चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं।
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आगरा नगर निगम
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विस्तार
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बुधवार दोपहर एक बजे नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय के बाहर अमर उजाला रिपोर्टर ने प्रमाणपत्र बनाने के लिए जानकारी की तो वहीं टहल रहे व्यक्ति हरीश ने अपने साथ ले जाकर पार्क में बैठे दलाल से मुलाकात करा दी। दलाल के साथ रिपोर्टर की बातचीत के अंश...  
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रिपोर्टर : घर में बच्चा हुआ है, प्रमाणपत्र बनवाना है।
दलाल : बन जायेगा, 600 रुपये लगेंगे, 15 दिन बाद आकर ले जाना।

रिपोर्टर : क्या क्या लाना होगा।
दलाल : केवल बच्चे और अपना, पत्नी का फोटो, आधार कार्ड, पड़ोसियों के फोटो आधार कार्ड।

रिपोर्टर : अपना कार्ड, फोटो तो है, पर पड़ोसी नहीं देंगे, वो हमें जानते नहीं हैं।
दलाल : ठीक है, कोई बात नहीं, फिर 1000 रुपये लगेंगे, हम पड़ोसी की व्यवस्था करा देंगे। पैसे, फोटो लेकर आ जाना। 

रिपोर्टर : ये तो बहुत ज्यादा हैं, मैं सीधे बनवा लूंगा।
दलाल : तो बनवा लो, दो महीने बाद मेरे ही पास आओगे। सुपरवाइजर, इंस्पेक्टर जांच के लिए जाते हैं। इसी जांच में फंसे रहोगे। मैं 15 दिन से पहले ही बनवा रहा हूं। फिर मेरे पास मत आना

21 दिन का समय, 63 दिन से चक्कर काट रहे लोग 
71 साल के छोटे लाल धाकरे निवासी कटरा काछियान, गुदड़ी मंसूर खान की मृत्यु के बाद उनके पुत्र हरिओम धाकरे ने 7 जुलाई को प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया लेकिन 63 दिन बीत जाने के बाद भी हरिओम धाकरे चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं।


मजदूरी पर काम करने वाले छोटे लाल धाकरे का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए हर सप्ताह दो बार उनके पुत्र नगर निगम ऑफिस आ रहे हैं। क्षेत्रीय पार्षद राकेश जैन भी उनके लिए पैरवी कर चुके हैं लेकिन प्रमाणपत्र नहीं बना। 

इंस्पेक्टर, पार्षद की रिपोर्ट लगी, प्रमाणपत्र न बना
छता क्षेत्र की सिंगी गली निवासी सरदार मथुरा सिंह नंदा का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 7 अगस्त को आवेदन किया गया था लेकिन 33 दिन बीत जाने के बाद भी प्रमाणपत्र बन कर तैयार नहीं हुआ। इस अवधि में उनके परिजनों ने इंस्पेक्टर और सुपरवाइजर से रिपोर्ट भी लगवा ली। जिन गवाहों का जिक्र किया गया, उनका सत्यापन क्षेत्रीय पार्षद रवि माथुर भी कर चुके हैं, लेकिन कागजात लेकर उनके परिजन प्रमाणपत्र कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र अब तक बन नहीं पाया।  
 

नगर स्वास्थ्य अधिकारी ऑफिस आते नहीं 
प्रमाणपत्र ना बनने से परेशान लोग शिकायत के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी वीके सिंघल के ऑफिस पहुंचे, लेकिन उनके ऑफिस में कुर्सी खाली पड़ी थी। दोपहर बाद 4 बजे तक वीके सिंघल अपने ऑफिस में नहीं थे। पैरवी के लिए पहुंचे पार्षद रवि बिहारी माथुर और राकेश जैन का आरोप है कि डॉक्टर सिंघल ऑफिस आते ही नहीं है, जिस वजह से लोग परेशान हैं। प्रमाणपत्र बनने के बाद भी उस पर हस्ताक्षर नहीं होते। लोगों को 2 से 3 महीने तक चक्कर काटने पड़ते हैं।

दो महीने से काट रही चक्कर
पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 2 महीने से परेशान हूं। लेकिन प्रमाणपत्र अभी तक बना नहीं। हर दिन कोई न कोई नया कागज मांगने लगते हैं। एक बार में बताया नहीं। - परवीन बेगम, ताजगंज

दलाल ने 10-12 दिन में बनवाया
घर में बच्चे का जन्म हुआ था। 2 महीने तक मैं यहां के चक्कर काटता रहा। प्रमाणपत्र बनाया नहीं। फिर मैंने एक दलाल से बात की। आप समझो केवल 10-12 दिन में प्रमाण पत्र बन के आ गया फिर ना कोई कागज मांगा और ना कोई जांच हुई। - मो. इदरीस लोहामंडी

प्रमाणपत्र के लिए कर रहे परेशान
मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए परिजनों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। कागज और जांच के नाम पर महीनों तक अटका कर रखते हैं लेकिन वही काम दलाल बिना किसी कागज और जांच के करा देते हैं। यह क्या हो रहा है। हम लोग सत्यापन करके भेज रहे हैं लेकिन फिर भी लोगों को परेशान करते हैं। - राकेश जैन पार्षद, मोतीगंज

2012-14 में जन्मे बच्चों का रिकॉर्ड नहीं
साल 2012 और 2014 के बीच में आगरा के विभिन्न अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का कोई रिकॉर्ड वेबसाइट पर नहीं है। आगरा नगर निगम की वेबसाइट से पहले यह रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण साइट पर गया और उसके बाद यह भारत सरकार की वेबसाइट पर, लेकिन अब 2012 से 2014 के बीच का रिकॉर्ड नहीं निकल पा रहा है। जिन बच्चों ने इस दौरान जन्म लिया है, उनका जन्म प्रमाणपत्र डाउनलोड करना मुश्किल है। इसके लिए नगर निगम में दोबारा से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की मशक्कत करनी होगी।  


 
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48 हजार लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें 
आगरा में हर महीने 1800 से 2000 बच्चों का जन्म होता है। इस लिहाज से हर साल 24 हजार जन्म प्रमाण पत्र नगर निगम की साइट पर लोड किए जाते हैं। 2012 से 2014 के बीच 2 सालों में रिकॉर्ड गायब होने के कारण 48 हजार से ज्यादा लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। रिकॉर्ड ना होने के कारण जन्म प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि लेने के लिए उन्हें नगर निगम के कार्यालय आना होगा और नए प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

दलालों को हटाने के लिए बना रहे सिस्टम
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में दलालों की कोई भूमिका न रहे, इस सिस्टम को तैयार किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर केवल ऑनलाइन ही आवेदन होंगे और ऑनलाइन ही उन्हें डाउनलोड किया जा सकेगा।


ऑफिस आने की व्यवस्था खत्म कर दी जाएगी। हमने शिकायत पर एक ऑपरेटर को हटाया है और पूरे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को आमूलचूल बदलने वाले हैं। कोशिश की जा रही है कि कोई भी व्यक्ति प्रमाणपत्र के लिए नगर निगम ऑफिस न आये। प्रमाणपत्र बनने के बाद उसे किसी एजेंसी से करार कर घर पर ही पहुंचा दिया जाए। - निखिल टी फुंडे, नगर आयुक्त
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