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ब्रज चौरासी कोस में उठेगी यमुना बचाने की आवाज, 38 दिन तक साधु-संत करेंगे पदयात्रा

Mon, 04 Jan 2021 12:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • बटेश्वर से वृंदावन तक 84 कोस की पद यात्रा करेंगे साधु-संत और श्रद्धालु 
  • यात्रा में मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तक के संत होंगे शामिल
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बटेश्वर में यमुना किनारे स्थित मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक फरवरी से ब्रज चौरासी पदयात्रा में यमुना को बचाने की अलख जगाने की तैयारी है। आगरा के बटेश्वर से वृंदावन तक 84 कोस की पदयात्रा कर साधु और श्रद्धालु यमुना किनारे के लोगों को जागरुक करेंगे। 38 दिन की इस यात्रा में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल तक के संत और श्रद्धालु शामिल होंगे। 

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इस पदयात्रा को लेकर सुरभि सेवा सदन भद्रवन मथुरा के वंदनदास गिरि और बटेश्वर के सियाराम दास ने रविवार को संतों के साथ बैठक की। सियाराम दास ने बताया कि एक फरवरी से 10 मार्च तक आयोजित होने वाली यह यात्रा बटेश्वर की ऐतिहासिक शिव मंदिर श्रृंखला पर यमुना पूजन से शुरू होगी। 
वंदनदास गिरि ने कहा कि इस यात्रा के दौरान बटेश्वर, रेणुका धाम च्यवन ऋषि आश्रम, पांडव तपो भूमि, व्यास जन्म स्थान, सत्यवती जन्म स्थान, शृंगी ऋषि तपो भूमि, सूरदास तपो भूमि, नारद गुफा, श्रीकृष्ण स्वधाम गमनस्थल, दाऊजी, चिंता हरण, गोकुल, रमण रेती, कृष्ण जन्म भूमि, ध्रुव तप स्थान, शांतुन कुंड, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, कोकिला वन, चमेली वन, बलराम कुंड, भद्रवन धाम, वंशीवट, राधारानी मंदिर में दर्शन किए जाएंगे। इन सभी धार्मिक विरासतों के संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा। 

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यहां पर होंगे पड़ाव
एक फरवरी को सियाराम दास आश्रम बटेश्वर, दो फरवरी को चौसिंगी, तीन फरवरी को भदरौली, चार फरवरी को अरनौटा,  पांच फरवरी को फतेहाबाद, छह फरवरी को गोसाई गढ़ी, सात फरवरी को घाघपुरा, आठ फरवरी को  कोलारा, नौ फरवरी को रामपाल की गढ़ी, 10 फरवरी को दिगनेर, 11 फरवरी को अकबरपुरा, 12 फरवरी को कहरई, 13 फरवरी को बोदला, 14 फरवरी को अकबरा, 15 फरवरी कबीस आश्रम पड़ाव होगा। 

16 फरवरी को सेलखेड़ा, 17 फरवरी को दाऊजी, 18 फरवरी को गोकुल, 19 फरवरी को अडीग, 20 फरवरी को गोवर्धन, 21 फरवरी को बहज, 22 फरवरी को टांकौली, 23 फरवरी को आदिबद्री, 24 फरवरी को केदारनाथ, 25 फरवरी को कामा , 26 फरवरी को बरसाना, 27 फरवरी को कोकिला वन, 28 फरवरी को कोटवन, 1 मार्च को चमेलीवन, 2 मार्च को वनचारी, 3 मार्च को बांसवा, 4 मार्च को पैगांव, 5 मार्च को शेरगढ़, 6 मार्च को हनुमानजी की झाड़ी, 7 मार्च को नौझील, 8 मार्च को टैंटीगांव, 9 मार्च को वंशीवट, 10 मार्च को वृंदावन में समापन होगा।
                                                                                                                                                                      
इस यात्रा के ये भी हैं उद्देश्य 
गोरक्षा, हरिनाम प्रचार, सनातन संस्कृति रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ भारत समृद्ध भारत जागरण, नशा मुक्ति और सामाजिक बुराइयों रहित समाज का निर्माण करना भी इस यात्रा का उद्देश्य है। 
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