सिर में एक ही हिस्से में बार-बार दर्द हो रहा है। दर्द से सो नहीं पाते और खासतौर से सुबह नींद उचट जाए तो दिमाग में कैंसर के ट्यूमर का खतरा है। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी होने पर मर्ज हाई रिस्क ग्रेड में पहुंच जाता है, जहां मरीज की जान बचाना मुश्किल है। न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ आगरा के सहयोग से वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोसर्जिकल सोसाइटी के शैक्षणिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने ये जानकारी दी।
फतेहाबाद रोड स्थित होटल में मुंबई के पीडी हिंदुजा नेशनल हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत के. मिश्रा ने कहा कि ट्यूमर में सबसे ज्यादा 40 फीसदी ब्रेन ट्यूमर ग्लाइओमा के मरीज मिल रहे हैं। इनमें 60 फीसदी की उम्र 40 से 55 साल है। इनमें आंखों से डबल दिखना, तिरछा दिखना, सुनाई कम होना जैसी शिकायतें भी मिलीं। इन लक्षणों पर भी मरीज की लापरवाही से मर्ज हाईग्रेड ग्लाइओमा स्टेज पर पहुंच जाता है। इस स्थिति पर 10 में से 7 मरीज मिल रहे हैं, जिनको बचाना आसान नहीं है।
पहली स्टेज लो ग्रेड ग्लाइओमा पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। सचिव डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक से न्यूरोसर्जरी आसान हो गई हैं। इजरायल के डॉ. एंड्रयू काये, यूएसए के डॉ. केनन अर्नोटॉविक और जापान के डॉ. अक्यो मोरिता ने ट्यूमर से दृष्टिबाधित पर असर पर व्याख्यान दिया। सम्मेलन में डॉ. मृदुल शर्मा, डॉ. गौरव धाकरे, डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. आदित्य वाष्णेर्य आदि मौजूद रहे।
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न्यूरोसर्जरी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी अहम : डॉ. आरसी मिश्रा
आयोजन अध्यक्ष वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. आरसी मिश्रा ने कहा कि न्यूरोसर्जरी में आधुनिक तकनीक अहम हो गई है। न्यूरोसर्जरी में माइक्रो-रोबेटिक सर्जरी का चलन बढ़ा है। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी की भी अहम भूमिका हो गई है। इन तकनीकी से न्यूरोसर्जरी में बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
रोबोटिक थेरेपी से ठीक हो रहे लकवाग्रस्त मरीज : डॉ. वीपी सिंह
गुरुग्राम के मेदांता मेडिसिटी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के चेयरमैन डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि लकवाग्रस्त मरीज के इलाज में स्पीच थेरेपी, साइको थेरेपी और रोबोटिक रिहेबिलेशन थेरेपी कारगर है। रोबोटिक थेरेपी के लिए दिल्ली, मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में सेटअप लगा है। इसमें मरीज के हाथ, पैर और शरीर की थेरेपी रोबोट कराता है। इसमें 10 से 30 बार सिटिंग करानी होती है। एक सिटिंग का खर्च करीब 2 से पांच हजार रुपये रहता है।